आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को ‘‘विश्व की आत्मा’’ करार देते हुए सोमवार को कहा कि देश के आध्यात्मिक ज्ञान ने उसे भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के उन तूफानों के बीच टिकाए रखा, जिन्होंने कई समाजों को नष्ट कर दिया।
भागवत ने नागपुर में ‘पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव’ में संतों की एक सभा को संबोधित करते हुए देश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और उसे लोगों तक पहुंचाने में संतों की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक हमारा देश अस्तित्व में है, दुनिया ठीक रहेगी, क्योंकि यदि दुनिया शरीर है तो भारत उसकी आत्मा है।’’
भागवत ने कहा कि ‘‘भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के तूफानों’’ ने दुनिया के कई समाजों को नष्ट कर दिया, लेकिन भारत अपने आध्यात्मिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता के कारण इनसे बचा रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कहा जाता है कि यूनान, मिस्र और रोम की प्राचीन सभ्यताएं दुनिया से मिट गईं लेकिन हमारे अस्तित्व में कुछ विशेष बात है कि यह मिटा नहीं। यह अस्तित्व वह ज्ञान है जो हमें संतों और महात्माओं से मिला है।’’