आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शनिवार को बजट सत्र के अंतिम दिन भारी हंगामा देखने को मिला। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सदस्यों ने हाल ही में हुए गांदरबल मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग करते हुए शोर-शराबा किया।
सेना ने दावा किया है कि 31 मार्च को अरहामा के जंगलों में हुई मुठभेड़ में मारा गया व्यक्ति एक आतंकवादी था। उसकी पहचान गांदरबल निवासी राशिद अहमद मुगल के रूप में हुई है।
राशिद अहमद के परिवार ने आरोप लगाया कि उसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था और मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए उसके शव को वापस करने की मांग की है, ताकि वे उसे सुपुर्द-ए-खाक कर सकें।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने हत्या की निंदा की और इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से बयान की मांग की।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश दिए और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी।
इस मुद्दे को उठाते हुए, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मुबारक गुल ने एक "निर्दोष" की हत्या के खिलाफ सदन से कड़ा संदेश देने का आह्वान किया और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
उनके पार्टी सहयोगी और पूर्व न्यायाधीश हसनैन मसूदी ने इस बात पर जोर दिया कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार का अधिकार मौलिक और संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त है, और न्याय और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने शव लौटाने की परिवार की मांग का समर्थन करते हुए कहा, "इस अधिकार पर कोई भी प्रतिबंध न्याय के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।"
मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के लिए अपनाई जाने वाली मानक प्रक्रिया के अनुसार, मुगल को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पुलिस द्वारा दफनाया गया।