उद्धव की कांग्रेस से दोस्ती ने शिवसेना को विभाजित किया: रामदास अठावले

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 13-01-2026
Uddhav Thackeray's friendship with the Congress party divided the Shiv Sena: Ramdas Athawale
Uddhav Thackeray's friendship with the Congress party divided the Shiv Sena: Ramdas Athawale

 

मुंबई

केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास अठावले ने सोमवार को कहा कि अगर उद्धव ठाकरे 2019 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के साथ बने रहते, तो शिवसेना का पारंपरिक 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह उन्हीं के पास रहता। उन्होंने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक रणनीतियों को 2022 में शिवसेना के विभाजन का मुख्य कारण बताया।

अठावले ने कहा कि 2019 के चुनावों में शिवसेना ने विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सीटें जीती थीं। अगर उद्धव ठाकरे भाजपा के साथ बने रहते, तो चुनाव चिन्ह उन्हें मिलता और पार्टी की विरासत सुरक्षित रहती। उन्होंने कहा, "दिवंगत बालासाहेब ठाकरे कांग्रेस के विरोध में थे, लेकिन उद्धव ठाकरे ने उसी पार्टी के साथ हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री बनने का रास्ता चुना।"

उन्होने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में भ्रष्टाचार को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि निगम को उद्धव ठाकरे के प्रभाव से मुक्त कर महायुति गठबंधन के नियंत्रण में लाना चाहिए। अठावले ने महायुति के रैलियों में बड़ी भीड़ जुटने का दावा किया और कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संयुक्त रैली की तुलना में उनकी रैली में ज्यादा लोग शामिल हुए।

हालांकि, अठावले ने ठाकरे कजिनों की दोस्ती को राजनीतिक दृष्टि से “अच्छी बात” भी बताया। उन्होंने महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र की सराहना की और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में कई बड़े विकास कार्य किए हैं।

अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेट्रो प्रोजेक्ट, उपनगरीय रेलवे सेवाओं के आधुनिकीकरण, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास और गरीबों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण के लिए पर्याप्त धन जारी किया है, जिसमें धारावी पुनर्विकास परियोजना भी शामिल है।

BMC चुनावों के दृष्टिगत अठावले की यह टिप्पणी महायुति गठबंधन के प्रचार और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के खिलाफ एक रणनीतिक संदेश मानी जा रही है।