आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि औषधि क्षेत्र एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है जो जनस्वास्थ्य, आर्थिक मजबूती और भारत की क्षमताओं में वैश्विक विश्वास को सीधे प्रभावित करता है।
अहमदाबाद के पास सनाथल में ‘फार्मास्युटिकल एकेडमी फॉर ग्लोबल एक्सीलेंस’ (पीएजीई) के शिलान्यास समारोह में शाह ने इस पहल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘औषधि क्षेत्र एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है – जो जनस्वास्थ्य, आर्थिक मजबूती और भारत की क्षमताओं में वैश्विक विश्वास को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। पीएजीई आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्नत कौशल, गुणवत्ता उत्कृष्टता और उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से घरेलू क्षमताओं को मजबूत करता है।’’
यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में शाह के हवाले से कहा गया कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के तहत, भारत ‘मेक इन इंडिया’ से ‘डिस्कवर एंड मेक इन इंडिया’ की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ेगा, जिसमें गुणवत्ता और नवाचार विकास के स्तंभ होंगे।
पीएजीई, ‘इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस’ (आईपीए) कंपनियों की उद्योग-नेतृत्व वाली राष्ट्रीय कौशल विकास पहल है। आईपीए सदस्यों ने औषधि विनिर्माण और गुणवत्ता उत्कृष्टता के उद्देश्य से इस पहल के लिए पांच करोड़ अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं।
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि गुजरात लंबे समय से भारत के औषधि उद्योग में अग्रणी रहा है और अहमदाबाद में पीएजीई अकादमी की स्थापना से राष्ट्रीय औषधि के केंद्र के रूप में राज्य की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी तथा देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी एवं स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान मिलेगा।
आईपीए के अध्यक्ष और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज के प्रबंध निदेशक डॉ. शरविल पटेल ने कहा, ‘‘पीएजीई कुशल प्रतिभा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और मजबूत गुणवत्ता प्रणालियों के माध्यम से विश्वस्तरीय विनिर्माण और गुणवत्ता क्षमताओं के निर्माण के लिए उद्योग की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है।’’
पीएजीई नए स्नातकों, शॉप फ्लोर ऑपरेटर, दवा कंपनियों के कर्मचारियों, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और कामकाजी पेशेवरों के लिए संरचित कार्यक्रम पेश करेगा, जिससे दवा मूल्य श्रृंखला में निरंतर क्षमता विकास संभव हो सकेगा।
इस कार्यक्रम में दवा उद्योग के प्रमुख नेता, सरकारी हितधारक और शैक्षणिक संस्थान शामिल हुए।