तिब्बत
शुक्रवार को तिब्बत में भूकंप के दो झटकों से धरती कांप उठी। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, सुबह 7:19 बजे तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इस भूकंप की गहराई 40 किलोमीटर बताई गई है।
NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया,“EQ of M: 4.4, Date: 06/02/2026, Time: 07:19:41 IST, Latitude: 33.23 N, Longitude: 83.31 E, Depth: 40 Km, Location: Tibet.”
इससे पहले, शुक्रवार तड़के 2:30 बजे इसी क्षेत्र में 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। यह भूकंप अपेक्षाकृत कम गहराई, यानी लगभग 25 किलोमीटर पर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंप अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि उनकी कंपन सीधे सतह तक पहुंचती है और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
NCS के मुताबिक,“EQ of M: 4.5, Date: 06/02/2026, Time: 02:30:30 IST, Latitude: 33.27 N, Longitude: 83.39 E, Depth: 25 Km, Location: Tibet.”
भूकंप विज्ञानियों का कहना है कि उथले (shallow) भूकंपों के बाद आफ्टरशॉक्स की संभावना बनी रहती है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या जानमाल की क्षति की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
तिब्बत और नेपाल का इलाका भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र उस प्रमुख फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। इसी टकराव के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ और आज भी यहां भूगर्भीय गतिविधियां लगातार जारी हैं।
तिब्बती पठार (Tibetan Plateau) की ऊंचाई भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से उत्पन्न क्रस्टल थिकनिंग का नतीजा है। यहां स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल फॉल्टिंग जैसी जटिल टेक्टोनिक प्रक्रियाएं सक्रिय हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दक्षिणी तिब्बत में उत्तर-दक्षिण दिशा में फैले कई रिफ्ट और फॉल्ट सिस्टम मौजूद हैं, जिनका निर्माण लाखों साल पहले शुरू हुआ था।
विशेषज्ञ बताते हैं कि तिब्बत में सबसे बड़े भूकंप आमतौर पर स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट्स के कारण आते हैं, जिनकी तीव्रता 8.0 या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। वहीं, नॉर्मल फॉल्टिंग से उत्पन्न भूकंप अपेक्षाकृत कम तीव्रता के होते हैं, लेकिन फिर भी वे व्यापक असर डाल सकते हैं।