सलमान अली ने सुरों से सजाई सूरजकुंड की शाम, हजारों श्रोताओं ने लिया लाइव कॉन्सर्ट का आनंद

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  [email protected] | Date 06-02-2026
Salman Ali graced the Surajkund evening with his melodious voice, and thousands of listeners enjoyed the live concert.
Salman Ali graced the Surajkund evening with his melodious voice, and thousands of listeners enjoyed the live concert.

 

ओनिका माहेश्वरी/ फरीदाबाद

39वें सूरजकुंड इंटरनेशनल आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल 2026 की मुख्य चौपाल पर गुरुवार की शाम संगीत प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय उत्सव बन गई, जब इंडियन आइडल–10 के विजेता और लोकप्रिय गायक सलमान अली ने मंच संभाला। उनकी सशक्त, मधुर और रूह तक उतर जाने वाली आवाज़ ने पूरे परिसर को सुरों की ऐसी चादर में लपेट लिया कि उपस्थित हर शख्स खुद को एक भव्य लाइव कॉन्सर्ट का हिस्सा महसूस करने लगा। यह केवल एक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि संगीत, भावना और सूफियाना रंग का जीवंत अनुभव था।

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कार्यक्रम शुरू होने से काफी पहले ही मुख्य चौपाल दर्शकों से खचाखच भर चुकी थी। हजारों की संख्या में लोग सलमान अली की एक झलक पाने और उनकी आवाज़ को लाइव सुनने के लिए समय से पहले पहुंच गए थे। बैठने की जगह सीमित पड़ गई तो भी उत्साह कम नहीं हुआ लोग स्टैंडिंग एरिया, प्रवेश द्वारों और एलईडी स्क्रीन के पास खड़े होकर कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट, रिकॉर्डिंग और तालियों की गूंज ने पूरे माहौल को किसी बड़े म्यूजिक फेस्टिवल जैसा बना दिया।

सलमान अली ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत सूफियाना अंदाज़ में की, जिसने पहले ही गीत से वातावरण को भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। जैसे ही उन्होंने “सांसों की माला पे सिमरूं मैं पिया का नाम…” के बोल छेड़े, चौपाल तालियों और वाहवाही से गूंज उठी। उनकी आवाज़ की गहराई और सुरों की पकड़ ने दर्शकों को तुरंत जोड़ लिया। यह शुरुआत इस बात का संकेत थी कि आने वाली शाम संगीत के उच्चतम स्तर की होने वाली है।

मंच से संवाद करते हुए सलमान अली ने फरीदाबाद और सूरजकुंड मेले से अपने आत्मीय संबंध का जिक्र भी किया। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “फरीदाबाद मेरा दूसरा घर है।” इस एक वाक्य ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। चौपाल में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। यह जुड़ाव दर्शाता है कि सलमान अली केवल मंचीय कलाकार नहीं, बल्कि अपने श्रोताओं से दिल का रिश्ता बनाने वाले गायक हैं।

इसके बाद उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की श्रृंखला से कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। “मेरे रश्के कमर तूने पहली नजर…” और “जरा सी दिल में जगह तू…” जैसे गीतों ने माहौल में रोमांच और ऊर्जा भर दी। हर गीत के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। युवा हों या बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग सुरों के साथ झूमते दिखाई दिए। मोबाइल कैमरों में हर पल को कैद करने की होड़ लगी रही, मानो हर श्रोता इस शाम को अपनी निजी याद बनाकर साथ ले जाना चाहता हो।

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कार्यक्रम का सबसे यादगार क्षण तब आया जब सलमान अली ने मशहूर सूफी कलाम “ओ लाल मेरी… बला झूलन लालन…” पेश किया। इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को रूहानी रंग में रंग दिया। तालियों की लय, दर्शकों की सामूहिक सहभागिता और सलमान अली की भावपूर्ण गायकी ने चौपाल को सूफी दरबार जैसा रूप दे दिया। कई श्रोता भाव-विभोर होकर साथ गुनगुनाते नजर आए।

सलमान अली की गायकी की गहराई का संबंध उनकी जड़ों से भी जुड़ा है। हरियाणा के मेवात क्षेत्र से आने वाले सलमान अली ऐसे सांस्कृतिक परिवेश में पले-बढ़े हैं, जहां लोक और सूफी संगीत की परंपरा सदियों से जीवित है। उनके परिवार में पीढ़ियों से गायन की विरासत रही है। यही कारण है कि उनकी आवाज़ में सहज मिठास, दर्द और आत्मिक कंपन सुनाई देता है। संगीत उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि पारिवारिक धरोहर है, जो उनकी हर प्रस्तुति में झलकती है।

 

उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे गीत को केवल गाते नहीं, बल्कि जीते हैं। हर शब्द, हर आलाप और हर ऊंचे सुर में भावनाओं की सच्चाई महसूस होती है। उनकी आवाज़ में जहां सूफियाना नज़ाकत है, वहीं मंचीय ऊर्जा और ताकत भी है। यही संतुलन उन्हें अलग पहचान देता है और विविध श्रोताओं से जोड़ता है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान चौपाल का दृश्य अत्यंत आकर्षक बना रहा। हजारों मोबाइल फ्लैशलाइट्स से जगमगाता मैदान किसी सितारों भरे आसमान जैसा प्रतीत हो रहा था। हर गीत के बाद देर तक तालियां गूंजती रहीं और दर्शक बार-बार “एक और गीत” की फरमाइश करते रहे। कलाकार और श्रोता के बीच यह जीवंत संवाद कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबसूरती रहा।

सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट फेस्टिवल अब केवल हस्तशिल्प और पारंपरिक कला का मंच नहीं, बल्कि संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। सलमान अली की प्रस्तुति ने इस पहचान को और मजबूत किया। मेवात की मिट्टी से निकली उनकी खानदानी गायकी और सूरजकुंड का अंतरराष्ट्रीय मंच—दोनों का संगम इस शाम को विशेष बना गया।

गौरतलब है कि इंडियन आइडल–10 के विजेता सलमान अली वर्ष 2026 में लगातार सक्रिय मंचीय प्रस्तुतियां दे रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने जयपुर में 31 जनवरी को एक लाइव शो किया, हैदराबाद की नुमाइश में कॉन्सर्ट प्रस्तुत किया और 8 फरवरी को मुंबई के एक सूफी म्यूजिक फेस्टिवल में भी परफॉर्म करने वाले हैं। उनकी लगातार बढ़ती मंचीय उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि वे आज भी लाइव कॉन्सर्ट सर्किट के सबसे पसंदीदा गायकों में शामिल हैं।

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सूरजकुंड की यह संगीतमय शाम इस बात का जीवंत प्रमाण बन गई कि जब आवाज़ में हुनर, विरासत और रूह की सच्चाई मिल जाए, तो संगीत केवल मनोरंजन नहीं रहता—वह दिलों को जोड़ने वाली ताकत बन जाता है। सलमान अली ने इस शाम को यादों का ऐसा सुरमयी तोहफा बना दिया, जिसे दर्शक लंबे समय तक संजोकर रखेंगे।