इकराम हुसैन ने जब अपनी नक्काशी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल जीत लिया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 06-02-2026
Ikram Hussain won the heart of Prime Minister Narendra Modi with his artwork.
Ikram Hussain won the heart of Prime Minister Narendra Modi with his artwork.

 

दयाराम वशिष्ठ

मुरादाबाद, जो अपनी पीतल की कला और हस्तशिल्प के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, ने अनेक प्रतिभाशाली शिल्पकारों को जन्म दिया है। इन सभी में एक नाम विशेष रूप से उभर कर आता है—इकराम हुसैन। 61 वर्षीय इकराम हुसैन ने अपने जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद पीतल की नक्काशी में वह महारत हासिल की है, जिससे उनका नाम न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है। उनकी नक्काशी इतनी प्रभावशाली है कि वे किसी भी चेहरे को हूबहू उकेर सकते हैं, और इसी कला की तारीफ स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।

f

dइकराम हुसैन का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने formal शिक्षा पूरी नहीं की, लेकिन परिवार की मदद करने और पारंपरिक शिल्प कौशल में दक्ष बनने के लिए उन्होंने 7 साल की उम्र से ही पीतल पर नक्काशी शुरू कर दी थी।

उनके पिता, हाजी अब्दुल हमीद और रजक पदक विजेता हाजी गुलाम नवी, भी पीतल पर नक्काशी का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कठिन थी कि सप्ताह में उन्हें मुश्किल से 5 से 7 रुपये मिल पाते थे। बावजूद इसके, इकराम ने कभी हार नहीं मानी और अपने हुनर को तराशते रहे।

मुरादाबाद की नक्काशी विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर पीतल की वस्तुओं पर नक्काशी कर उन्हें और भी सुंदर बनाते हैं। इकराम हुसैन ने इस कला को न केवल अपनाया बल्कि उसे एक नई ऊँचाई तक पहुँचाया। उन्होंने मेहनत और समर्पण के साथ पीतल की नक्काशी में उत्कृष्टता प्राप्त की और अब उनकी नक्काशी की छवि इतनी प्रभावशाली है कि किसी भी व्यक्ति का चेहरा हूबहू उकेर देना उनके लिए संभव है।

इकराम हुसैन की कला में न केवल तकनीकी कौशल है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक एकता का संदेश भी छुपा है। उन्होंने पीतल के उत्पादों पर हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों के प्रतीकों को उकेरकर यह संदेश दिया कि सभी धर्मों के लोग एक ही परिवार का हिस्सा हैं।

उनका कहना है, “हम सभी एक ही डाल के फूल हैं, बस रंग अलग-अलग हैं। हमें नफरत नहीं, बल्कि प्यार और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।” इस अनूठी कलाकृति के माध्यम से इकराम ने समाज को यह सिखाया कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर आपसी भाईचारा और एकता बनाए रखना आवश्यक है।

इस सामाजिक संदेश और अद्वितीय कलात्मक कौशल के लिए भारत सरकार ने 28 नवंबर 2022 को उन्हें नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया, जिसके साथ उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि भी प्रदान की गई।

इकराम हुसैन की कला का जादू केवल पुरस्कारों और सम्मान तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण भारत महोत्सव में दिल्ली के भारत मंडपम में लाइव प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने पीतल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी स्वर्गीय मां की तस्वीर उकेरी। इसे देखकर प्रधानमंत्री खुद प्रभावित हुए और इकराम को शाबाशी दी। इस प्रकार की पहचान ने इकराम के आत्मविश्वास को और भी बढ़ाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनकी कला में सीमाओं को पार करने की क्षमता है।

इकराम हुसैन के जीवन में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ और उपलब्धियाँ रही हैं। वर्ष 1979 में उन्होंने इदगाह गुरूद्वारा के प्रबंधक के लिए एल्यूमिनियम प्लेट पर अपनी माता का नाम खुद लिखकर पहली बार अपने हुनर का प्रदर्शन किया। पढ़ाई न होने के बावजूद उन्होंने यह काम पूरी निष्ठा और मेहनत से किया, और इसके बदले उन्हें 10 रुपये मिले। इस छोटी-सी घटना ने उनकी हिम्मत और उत्साह को बढ़ाया और उन्हें अपने काम में और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समय के साथ उनकी कला ने उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया। वर्ष 2004 में उनकी उत्कृष्ट नक्काशी के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने उन्हें अवार्ड और पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया। उस समय यह राशि उनके परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी, और उनका हौसला और भी बढ़ गया। इसके बाद इकराम हुसैन ने बैंक से लोन लेकर अपने कारोबार को बढ़ाया और आज उनकी कंपनी करोड़ों में कारोबार करती है।

fइकराम ने अपने अनुभव और कला का लाभ दूसरों को भी दिया। उन्होंने उपेंद्र महारथी शिल्प अनुदान संस्थान में प्रशिक्षकों के रूप में काम करते हुए 400 से अधिक छात्रों को नक्काशी की ट्रेनिंग दी। उनके पिता भी यही काम करते थे और इकराम ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके उत्कृष्ट काम की वजह से उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

dइकराम हुसैन की कला का प्रभाव केवल व्यक्तिगत या आर्थिक सफलता तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक

सहिष्णुता को भी अपनी नक्काशी के माध्यम से समाज में फैलाया। उन्होंने पीतल के उत्पादों पर चारों धर्मों के प्रतीक उकेरकर स्पष्ट किया कि सभी धर्मों की जड़ें समान हैं, केवल उनकी अभिव्यक्ति अलग है।

उनकी यह सोच और दृष्टिकोण न केवल समाज में एकता का संदेश फैलाता है बल्कि कला के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की भी प्रेरणा देता है।

इकराम हुसैन की नक्काशी को कई महत्वपूर्ण स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है।

उनके बनाए गए पीतल के फूलदान और चित्रण लखनऊ के म्यूजियम में और स्वर्ण मंदिर में देखे जा सकते हैं। उन्होंने राम मंदिर के नक्शे का सुंदर चित्रण भी किया है। उनकी नक्काशी की सूक्ष्मता और जटिलता देखकर कोई भी दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाता है।

अवार्ड और सम्मान की सूची देखकर उनकी कला की प्रतिष्ठा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्हें मुलायम सिंह के हाथों स्टेट अवार्ड सेकेंड, भीम राव अंबेडकर पुरस्कार सेकेंड, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया स्टेट अवार्ड फर्स्ट, केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल द्वारा नेशनल अवार्ड सेकेंड, गोहावटी सरकार से दो सम्मान और प्रधानमंत्री के हाथों सम्मान समेत लगभग 20 पुरस्कार मिल चुके हैं। इस अद्भुत योगदान और उत्कृष्ट कलाकारी के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

इकराम हुसैन की कहानी सिर्फ एक शिल्पकार की कहानी नहीं है, यह संघर्ष, मेहनत, धैर्य और सामाजिक संदेश की कहानी है। उन्होंने अपने जीवन में दिखाया कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी अगर मेहनत, समर्पण और जुनून हो, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि कला केवल सौंदर्य और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह समाज में भाईचारे, सहिष्णुता और एकता का संदेश फैलाने का शक्तिशाली साधन भी हो सकती है।

f

मुरादाबाद के इस शिल्पगुरु ने पीतल की नक्काशी को नई पहचान दी है। उनके जीवन और कला ने साबित कर दिया है कि सच्ची मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति सीमाओं को पार कर सकता है।

इकराम हुसैन न केवल पीतल की नक्काशी में मास्टर हैं, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक सहिष्णुता के संदेशवाहक भी हैं। उनकी कला ने भारत की पारंपरिक शिल्पकला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है और उनके योगदान ने समाज में एक नई मिसाल कायम की है।

आज इकराम हुसैन सिर्फ मुरादाबाद के ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन और कला यह संदेश देती है कि मेहनत, समर्पण और समाज के लिए संदेश देने की भावना से कोई भी व्यक्ति अपने क्षेत्र में असाधारण पहचान बना सकता है। उनकी नक्काशी न केवल कला का उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक भाईचारे, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।

s

इकराम हुसैन का यह जीवन परिचय हमें यह याद दिलाता है कि कला केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के लिए गौरव और प्रेरणा का स्त्रोत बन सकती है। उनकी पीतल की नक्काशी, उनके सामाजिक संदेश और उनकी मेहनत की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह दिखाएगी कि अगर जुनून और समर्पण हो तो कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।