जम्मू (जम्मू-कश्मीर)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर पहुंचे हैं, जहां उनका कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस दौरे के दौरान अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा हालात की गहन समीक्षा करेंगे और साथ ही विकास परियोजनाओं की प्रगति का भी आकलन करेंगे। गृह मंत्री बुधवार देर रात जम्मू के लोक भवन पहुंचे।यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा बुनियादी ढांचे व जनकल्याण योजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।
अपने प्रवास के दौरान अमित शाह उच्चस्तरीय बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जिनमें मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। खासतौर पर सीमा क्षेत्रों और संवेदनशील जिलों में हालात पर चर्चा होगी। इन बैठकों में गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर प्रशासन, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बैठकों के एजेंडे में आतंकवाद विरोधी अभियान, सीमा प्रबंधन, घुसपैठ की कोशिशों और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जैसे अहम मुद्दे शामिल रहेंगे। उद्देश्य साफ है—क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कानून-व्यवस्था को हर हाल में बनाए रखना।
सुरक्षा के साथ-साथ गृह मंत्री विकास कार्यों पर भी उतना ही ध्यान देंगे। जम्मू क्षेत्र में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। केंद्र सरकार लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सड़क, बिजली, कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के विकास को प्राथमिकता देती रही है।
इसके अलावा, केंद्र की प्रमुख योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के जमीनी क्रियान्वयन की स्थिति भी समीक्षा के दायरे में रहेगी। सरकार का लक्ष्य है कि विकास की रफ्तार तेज हो और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।
अपने दौरे के तहत अमित शाह सीमा सुरक्षा बल (BSF) की बॉबिया और गुरनाम सीमा चौकियों का भी दौरा करेंगे। यहां वे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जमीनी हालात का जायजा लेंगे और BSF जवानों से सीधे संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि गृह मंत्री चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की सराहना भी करेंगे।
दौरे का एक भावनात्मक और अहम पहलू यह भी है कि अमित शाह ड्यूटी के दौरान शहीद हुए वीर जवानों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत पात्र परिवारजनों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। यह कदम शहीद परिवारों के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।