ट्रंप बोले- ईरान की बातचीत की पहल के बाद रोके अमेरिकी सैन्य अभियान

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 28-07-2026
Trump says US military operations halted following Iran's initiative for talks.
Trump says US military operations halted following Iran's initiative for talks.

 

वॉशिंगटन।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की ओर से शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की इच्छा जताए जाने के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। उनके अनुसार, "उन्होंने हमसे बेहद विनम्रता से कहा कि कृपया अभियान रोकिए और आइए बातचीत करते हैं। अब हम उसी स्थिति में हैं और आगे क्या होता है, यह देखेंगे। यदि कोई समझौता नहीं हो पाया, तो हमें पहले वाले रास्ते पर लौटना पड़ेगा।"

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के सप्ताहों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया था। जुलाई की शुरुआत में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) पर आरोप लगा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में दो अमीराती तेल टैंकरों पर ड्रोन हमला किया। अमेरिकी प्रशासन ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बताया।

इन घटनाओं के बाद अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के सैन्य और कुछ अन्य ठिकानों पर कई हवाई हमले किए। इसके जवाब में आईआरजीसी ने मध्य-पूर्व के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। दोनों पक्षों के बीच लगातार कई दिनों तक जवाबी सैन्य कार्रवाई चलती रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।

लगातार 13 रातों तक चले हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद 25 जुलाई को सेंटकॉम ने अपने सैन्य अभियान अस्थायी रूप से रोक दिए। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर अपने जवाबी हमले रोक दिए। फिलहाल दोनों देशों के बीच सैन्य मोर्चे पर अपेक्षाकृत शांति बनी हुई है।

इस बीच, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ब्रिटिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा था कि ईरान शुरू से ही "हमले के बदले हमला" की नीति पर चल रहा है। अधिकारी के अनुसार, यदि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई बंद रखता है, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में ईरान पहले ही अमेरिका तक अपना संदेश पहुंचा चुका है।

रॉयटर्स की इस रिपोर्ट के लगभग 24 घंटे बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है और इसी कारण अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान रोकने का निर्णय लिया।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में दोनों देशों के आधिकारिक बयानों में स्पष्ट विरोधाभास भी देखने को मिला है। दो दिन पहले, 26 जुलाई को ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि फिलहाल अमेरिका के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की कोई योजना नहीं है। ऐसे में ट्रंप के दावे और ईरानी सरकार के आधिकारिक रुख के बीच अंतर बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रुकने से तत्काल तनाव में कमी जरूर आई है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। वहीं, बातचीत विफल होने की स्थिति में दोनों देशों के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव तेज होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।