Tighter insurance commission norms may pose slight earnings risk for banks: Jefferies
नई दिल्ली
जेफ़रीज़ की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इंश्योरेंस कमीशन पर प्रस्तावित सख्त सीमाएं बैंकों की कमाई के लिए थोड़ा जोखिम पैदा कर सकती हैं, खासकर क्रेडिट-प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स से मिलने वाली बैंकाश्योरेंस फीस के मामले में। ऐसा इसलिए है क्योंकि इंश्योरेंस रेगुलेटर FY28 से डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट और कमीशन स्ट्रक्चर को फिर से तय करने की योजना बना रहा है। जेफ़रीज़ ने कहा, "इंश्योरेंस रेगुलेटर FY28 से इंश्योरेंस कमीशन पर सख्त सीमाएं लगाने का प्रस्ताव कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित नियम भविष्य में लागू होंगे और रेगुलेटर ने अगले महीने के दौरान इन नियमों के ड्राफ्ट पर जनता की राय मांगी है। ब्रोकरेज ने कहा कि ये बदलाव बैंकों की बैंकाश्योरेंस फीस, खासकर क्रेडिट-प्रोटेक्शन प्रीमियम के लिए "थोड़े नकारात्मक" होंगे, क्योंकि ये ज़्यादातर सिंगल-प्रीमियम प्रोडक्ट्स होते हैं जिन पर अपेक्षाकृत ज़्यादा कमीशन मिलता है।
ये टिप्पणियां इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) द्वारा इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखने के बाद आई हैं। इन बदलावों में खर्च की कम सीमाएं, कमीशन स्ट्रक्चर में सुधार और गलत तरीके से बिक्री (mis-selling) के खिलाफ मज़बूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। IRDAI ने मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को तीन मुख्य कैटेगरी - इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज़, इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर्सन्स और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस - से बदलने का प्रस्ताव दिया है। यह बदलाव "एक जैसा स्ट्रक्चर, एक जैसे काम, एक जैसे नियम" के सिद्धांत पर आधारित फ्रेमवर्क के तहत किया जाएगा।
एक मुख्य प्रस्ताव इंश्योरेंस कंपनियों के 'एक्सपेंस ऑफ़ मैनेजमेंट' (EoM) की सीमा को कम करना है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, EoM की सीमा दो साल के भीतर ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) का 15 प्रतिशत और पांच साल के भीतर 12.5 प्रतिशत तय की जाएगी। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, यह सीमा पांच वर्षों में ग्रॉस रिटेन प्रीमियम के 30 प्रतिशत से घटकर घरेलू GDPI के 20 प्रतिशत तक आ जाएगी। रेगुलेटर ने बिज़नेस सेगमेंट, बिज़नेस की लाइन, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और पॉलिसी बेचने व सर्विस देने में लगने वाली मेहनत जैसे कारकों के आधार पर कमीशन को फिर से तय करने का प्रस्ताव भी दिया है।
बैंकों और NBFCs के लिए, प्रस्तावों में वॉल्यूम से जुड़े इंसेंटिव या इंश्योरेंस बेचने वाले कर्मचारियों के लिए रिवॉर्ड के खिलाफ सख्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं। साथ ही, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट पेमेंट को कमीशन की रेगुलेटरी परिभाषा के दायरे में लाने के उपाय भी शामिल हैं।
जेफ़रीज़ का आकलन बताता है कि कमीशन में बदलाव बैंकों की बैंकाश्योरेंस से होने वाली फीस इनकम को प्रभावित कर सकते हैं। क्रेडिट-प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स पर इसका असर ज़्यादा हो सकता है क्योंकि उनमें शुरुआती कमीशन स्ट्रक्चर काफी ऊंचा होता है। IRDAI ने 25 अक्टूबर, 2026 तक कंसल्टेशन पेपर पर स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से राय मांगी है। कमीशन में प्रस्तावित बदलाव भविष्य में लागू होंगे, जिससे मौजूदा बिज़नेस पर तुरंत असर कम पड़ेगा।