आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सरयू नदी के घाटों पर दीपों की जगमगाहट, रामनाम का जयघोष और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच रामयंत्र की मधुर धुन भी लोगों का ध्यान खींच रही है। गले में रामयंत्र टांगे और दोनों हाथों से उसकी ताल बजाते विक्रेता घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
रामभक्ति के गीतों के साथ जब रामयंत्र की धुन वातावरण में गूंजती है तो घाटों से गुजरते लोगों के कदम अनायास ही ठहर जाते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटकों के साथ विदेशी श्रद्धालु भी इसकी आवाज सुनकर आकर्षित होते हैं। महज 50 रुपये में एक जोड़ा रामयंत्र बेचने वाले ये छोटे विक्रेता धार्मिक आस्था को अपनी आजीविका का आधार बना रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि राम मंदिर के निर्माण और धार्मिक पर्यटन के विस्तार ने स्थानीय निवासियों व अन्य राज्यों के व्यापारियों के लिए आजीविका के नए रास्ते खोल दिए हैं।
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के अभियान का प्रभाव जमीन पर दिखाई देने लगा है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ छोटे व्यापारियों को मिल रहा है।
सरयू घाट पर रामयंत्र बेचने वाले गोरखपुर के सचींद्रनाथ का कहना है कि सामान्य दिनों में प्रतिदिन 800 से 1,000 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जबकि दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 1,800 से 2,500 रुपये तक पहुंच जाती है। उनके लिए रामयंत्र बेचना महज कारोबार नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़े रहने का एक माध्यम भी है।