जेपी एसोसिएट्स के लिए सफल बोलीदाता की चयन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष थीः एनसीएलएटी में सीओसी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-04-2026
The selection process for the successful bidder for JP Associates was transparent and fair: CoC in NCLAT
The selection process for the successful bidder for JP Associates was transparent and fair: CoC in NCLAT

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण से जुड़े मामले में ऋणदाताओं ने सोमवार को एनसीएलएटी से कहा कि सफल बोलीदाता के चयन की प्रक्रिया 'निष्पक्ष' और 'पारदर्शी' ढंग से अंजाम दी गई और किसी भी प्रतिभागी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम नहीं बनाए गए।
 
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बोली और मूल्यांकन स्वीकृत ढांचे के अनुरूप किए गए।
 
मेहता ने कहा कि जहां वेदांता लिमिटेड को शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के आधार पर सबसे अधिक अंक मिले, वहीं कुल मूल्यांकन में अदाणी एंटरप्राइजेज शीर्ष पर रही।
 
ऋणदाताओं की समिति ने वेदांता के संशोधित बोली प्रस्ताव को खारिज करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इसे स्वीकार करने पर समूची बोली प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती जिससे कर्ज समाधान में विलंब आता।
 
मेहता ने कहा, “बोली स्वीकार करने से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है और यह वाणिज्यिक समझदारी पर आधारित है, जिस पर अपीलीय समीक्षा सीमित है।”
 
उन्होंने यह भी कहा कि कोई प्रतिभागी सिर्फ यह कहकर प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता कि वह अधिक राशि देने को तैयार है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बाद में प्रस्ताव बढ़ाने से दिवालिया प्रक्रिया की पवित्रता प्रभावित होती है।
 
वेदांता ने एनसीएलएटी के समक्ष दायर अपनी याचिकाओं में कहा है कि उसका संशोधित प्रस्ताव अदाणी एंटरप्राइजेज के मुकाबले सकल मूल्य के आधार पर करीब 3,400 करोड़ रुपये और एनपीवी के आधार पर लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक है।
 
मेहता ने बताया कि वेदांता ने आठ नवंबर, 2025 को अपना संशोधित बोली प्रस्ताव दाखिल किया था जबकि चुनौती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। कंपनी ने अपने प्रस्ताव में 180 दिन के भीतर 400 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश का प्रस्ताव दिया था, जिसे संशोधित कर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया।