आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए) की कम कीमत वाली दवाएं बच्चों को उनकी गुणवत्ता के संबंध में विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर दी गई थीं।
मुरलीधरन ने पत्रकारों से कहा कि यह प्रक्रिया पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘विशेषज्ञ समिति ने भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं की गुणवत्ता अच्छी पाई थी, जिसके आधार पर सरकार ने इन्हें मरीजों को देने का फैसला किया। इन दवाओं को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, लोगों को अब भी कम कीमत वाली भारतीय दवाओं की तुलना में विदेशी दवाओं पर अधिक भरोसा है।’’
मंत्री ने कहा कि सरकार ने एसएमए नामक आनुवंशिक बीमारी की इस नयी दवा को कम कीमत पर अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाने के लिए यह फैसला किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों दवाओं की कीमत में लाखों रुपये का अंतर है।’’