श्रीनगर
कश्मीर घाटी में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण मंगलवार को यातायात के लिए बंद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को बुधवार को आंशिक रूप से खोल दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बर्फ साफ करने के बाद सड़क को दोनों तरफ से हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया है।
इस 270 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर फिलहाल केवल हल्के मोटर वाहन ही आवाजाही कर सकते हैं। यह मार्ग कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क मार्ग है, इसलिए राजमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के प्रयास जारी हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बर्फबारी के कारण सड़क के कुछ हिस्सों में फिसलन बनी हुई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कर्मी सड़क पर नमक और यूरिया का छिड़काव कर वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रहे हैं।
मौसम की वजह से मंगलवार को राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद था और श्रीनगर हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन भी रोक दिया गया था। हालांकि, बुधवार सुबह से हवाई अड्डे पर उड़ानों का परिचालन फिर से शुरू हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार रात कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में तापमान जमाव बिंदु से कई डिग्री नीचे गिर गया। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से एक डिग्री अधिक था। कश्मीर में केवल श्रीनगर (0.1 डिग्री) और बारामूला (0.4 डिग्री) ऐसे स्थान थे जहां रात का तापमान शून्य से ऊपर रहा।
उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग और मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 9.8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे दर्ज किया गया। दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में तापमान शून्य से 6.4 डिग्री नीचे रहा। काजीगुंड, कोकरनाग और कुपवाड़ा में क्रमश: शून्य से 4.3, 2.6 और 0.7 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरा।
कश्मीर घाटी इस समय ‘चिल्ला-ए-कलां’ के दौर से गुजर रही है, जो 40 दिनों की भीषण ठंड की अवधि है। इस दौरान रात का तापमान अक्सर जमाव बिंदु से कई डिग्री नीचे गिरता है और बर्फबारी की संभावना अधिक रहती है। यह चिल्ला-ए-कलां 21 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 30 जनवरी 2026 को समाप्त होगा।
मौसम विभाग ने बताया कि बुधवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है। इसके बाद 31 जनवरी तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क और बादल छाए रहने वाला रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ 1 फरवरी को इस क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे फिर से बर्फबारी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है।