तिआंजिन (चीन)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तिआंजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भागीदारी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात को चीनी राज्य मीडिया ने भारत-चीन संबंधों के लिए एक “ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़” बताया है. चीन के सरकारी मीडिया हाउस ‘शिन्हुआ’ और ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस द्विपक्षीय बातचीत को विशेष कवरेज देते हुए कहा कि यह बैठक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संबंधों को नई दिशा दे सकती है.
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद ‘X’ पर लिखा, “SCO समिट के दौरान तिआंजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सार्थक मुलाकात हुई. पिछले साल कज़ान में हुई बैठक के बाद से हमारे संबंधों में आई सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की. सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने की महत्ता और आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई.”
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए और तिआंजिन बैठक को रिश्तों को आगे बढ़ाने का एक नया पड़ाव बनाना चाहिए.
Had a fruitful meeting with President Xi Jinping in Tianjin on the sidelines of the SCO Summit. We reviewed the positive momentum in India-China relations since our last meeting in Kazan. We agreed on the importance of maintaining peace and tranquility in border areas and… pic.twitter.com/HBYS5lhe9d
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2025
उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद बढ़ाने, आपसी विश्वास मजबूत करने, सहयोग को व्यापक बनाने और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी गहराने की अपील की.
शी ने कहा, “भारत और चीन को सीमा विवाद को संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। दोनों एशियाई पड़ोसी शांति बनाए रखें और एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करें.
” उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पंक्ति दोहराते हुए कहा, “ड्रैगन और हाथी का सहयोगपूर्ण नृत्य ही दोनों देशों के लिए सही रास्ता है.”‘ग्लोबल टाइम्स’ और विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत-चीन न केवल दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की दो मजबूत स्तंभ भी हैं.
“इन दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों की समृद्धि सुनिश्चित करें, विकासशील देशों की एकता को मज़बूती दें और मानवता की प्रगति में योगदान करें,” माओ निंग ने ‘X’ पर लिखा.
सम्मेलन में मौजूद चीनी पत्रकार झांग शियाओ, जो हिंदी बोलती हैं और खुद को ‘अंजलि’ कहती हैं, ने भी भारत-चीन सहयोग की ज़रूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा, “हम दो पड़ोसी राष्ट्र हैं, दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और तकनीक, व्यापार, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं. मतभेद नहीं, सहयोग ज़रूरी है.”
CGTN के प्रमुख संपादक वू लेई ने कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. “सीमा विवाद को पीछे रखकर दोनों नेता व्यापक रिश्तों को मज़बूत करना चाहते हैं. अब दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों के बहाल होने की उम्मीद है और सुरक्षा, व्यापार, संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार होगा.”
वू ने यह भी बताया कि यह चीन द्वारा SCO शिखर सम्मेलन की पांचवीं मेज़बानी है, और इस बार ‘तिआंजिन डिक्लेयरेशन’ जारी किया जाएगा जिसमें वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस आयोजन को कवर करने के लिए 3,000 से अधिक पत्रकार पहुंचे हैं.
शिखर सम्मेलन के ऐतिहासिक आयाम की ओर इशारा करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें द्वितीय विश्व युद्ध में फासीवाद के खिलाफ जीत, चीन-जापान युद्ध की 80वीं वर्षगांठ और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना को लेकर भी साझा वक्तव्य आने की संभावना है. “यह वह समय है जब दुनिया को एक साथ खड़े होकर बहुपक्षीय सहयोग को नया बल देना चाहिए,” वू ने कहा.
इस प्रकार, तिआंजिन में हुई मोदी-शी मुलाकात को न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता और सहयोग के लिए भी एक निर्णायक क्षण माना जा रहा है.