सांप के काटने का खतरा हमारी सोच से कहीं बड़ा, नए अध्ययन में सामने आईं छिपी चुनौतियां

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 14-10-2026
The danger of snake bites is greater than we thought, new study reveals hidden challenges
The danger of snake bites is greater than we thought, new study reveals hidden challenges

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 सांप के काटने पर हर बार शरीर में जहर नहीं पहुंचता। लेकिन जब सांप का जहर शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो यह स्थिति ‘सर्प विषाक्तता’ कहलाती है। यह जानलेवा स्थिति हो सकती है। इसका सबसे अधिक असर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाले गरीब ग्रामीण समुदायों पर पड़ता है, जहां लोगों के लिए चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचना आसान नहीं है।
 
सांप के काटने और उष्णकटिबंधीय बीमारियों के महामारी विज्ञान के क्षेत्र में दशकों का संयुक्त अनुभव रखने वाले शोधकर्ताओं के रूप में हमने महसूस किया कि ‘सर्प विषाक्तता’ से निपटने के प्रयासों में आंकड़े उपलब्ध न होना गंभीर संकट है। जिन आधे से अधिक देशों में विषैले सांप लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं, वहां यह रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता कि कितने लोगों को सांप ने काटा या कितने लोग ‘सर्प विषाक्तता’ के शिकार हुए।
 
सहारा के दक्षिण में स्थित अफ्रीकी देशों और दक्षिण एशिया के ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने के कई पीड़ित ऐसे होते हैं, जिन्हें निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। उनके पास वहां तक पहुंचने के लिए परिवहन साधन नहीं होते या वे इलाज के लिए पारंपरिक चिकित्सकों के पास जाते हैं। नतीजतन, उनके मामलों का उल्लेख कभी भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों में नहीं मिल पाता।