अदालत ने बल प्रयोग का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर केंद्र और पुलिस से जवाब मांगा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-07-2026
The court sought responses from the Centre and the police on petitions alleging use of force.
The court sought responses from the Centre and the police on petitions alleging use of force.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र और दिल्ली पुलिस से उन दो याचिकाओं पर जवाब मांगा जिनमें आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को ‘संसद की तरफ मार्च’ के दौरान प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से अधिक बल का प्रयोग किया गया।
 
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, जिसमें सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और अन्य वीडियोग्राफी शामिल हैं।
 
पीठ ने जनहित याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और अधिकारियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
 
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘प्रतिवादियों की ओर से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल किया जाए।’’
 
अदालत ने कहा, ‘‘इस बीच हम निर्देश देते हैं कि रिट याचिकाओं में बताई गई घटना से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड (जिसमें सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी शामिल है) दिल्ली पुलिस या भारत सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार सुरक्षित रखा जाए।
 
इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
 
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर (जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे) जरूरत से अधिक बल का प्रयोग किया।
 
घटना की जांच का अनुरोध करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में अनियमितता के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे।