मृत यात्री के पास से टिकट न मिलने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 26-09-2026
 merely because the deceased passenger did not have a ticket: Court
merely because the deceased passenger did not have a ticket: Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 उच्चतम न्यायालय ने 2017 में गुजरात में चलती ट्रेन से गिरकर मारे गए एक व्यक्ति के माता-पिता को दिया गया मुआवजा बहाल करते हुए कहा है कि किसी मृत रेल यात्री के पास से टिकट बरामद नहीं होने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
 
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात उच्च न्यायालय का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें महेशभाई के माता-पिता को दिया गया मुआवजा खारिज कर दिया गया था। महेशभाई 27 सितंबर 2017 को अहमदाबाद के रास्ते सूरत जा रहा था और वह ट्रेन में अचानक झटका लगाने के कारण सामान्य डिब्बे से नीचे गिर गया था।
 
पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने रेल टिकट नहीं मिलने को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया और पीड़ित के पिता द्वारा शपथ लेकर दिए गए बयान एवं इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि पीड़ित एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा था। उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पीड़ित एक वैध यात्री था और उसका टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।’’
 
रेलवे दावा अधिकरण ने 17 जून 2022 को माना था कि महेशभाई एक ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’’ का शिकार हुआ और वह ट्रेन से दुर्घटनावश गिरा था। अधिकरण ने उसके माता-पिता को आठ लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था और उन्हें घटना की तारीख से आदेश की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिए जाने को कहा गया था।
 
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 27 सितंबर 2017 की घटना में महेशभाई गंभीर रूप से घायल हुआ था और इसके बाद वह एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा।
 
पीठ ने कहा, ‘‘31 अक्टूबर 2017 को उसकी मौत हो गई। सामान्य परिस्थितियों में, जब पीड़ित का इलाज चल रहा था, तो यह संभावना बहुत कम है कि दावेदारों ने रेल टिकट संभालकर रखा होगा।’’