नई दिल्ली
संसद का बजट सत्र 2026-27 आज से आरंभ हो रहा है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के साथ होगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही औपचारिक रूप से बजट सत्र का आग़ाज़ होगा।
बजट सत्र के दौरान 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा, जबकि केंद्रीय बजट 2026-27 को 1 फरवरी को लोकसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण का दस्तावेज़ वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसे मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में अंतिम रूप दिया गया है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, प्रमुख आर्थिक संकेतकों और आगामी वित्त वर्ष के दृष्टिकोण का विस्तृत विश्लेषण शामिल होगा।
यह बजट सत्र कुल 65 दिनों की अवधि में 30 बैठकों तक चलेगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा। सत्र के दौरान दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और फिर 9 मार्च से दोबारा कार्यवाही शुरू करेंगे। इस अवकाश अवधि में संसदीय स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की समीक्षा करेंगी।
पहले और दूसरे चरण की कार्यसूची
बजट सत्र के पहले चरण में मुख्य रूप से केंद्रीय बजट 2026-27 से संबंधित वित्तीय कार्य, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और आर्थिक नीतियों पर बहस होगी। वहीं, सत्र के दूसरे चरण में आवश्यक विधायी कार्यों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा किए जाने की संभावना है।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के तेवर
बजट सत्र से पहले मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सत्र के एजेंडे पर चर्चा हुई। बैठक के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन मुद्दों को रेखांकित किया, जिन्हें वे संसद में उठाने की योजना बना रहे हैं, साथ ही सरकार को सत्र के सुचारु संचालन में सहयोग का आश्वासन भी दिया।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि उनकी पार्टी सत्र के दौरान जन-केंद्रित मुद्दे उठाएगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस वोट चोरी, एसआईआर, धान खरीद, और मनरेगा को पुनः सशक्त बनाने जैसे विषयों को संसद में उठाएगी।
विभिन्न दलों की मांगें और चिंताएं
बीजू जनता दल (बीजेडी) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ने सर्वदलीय बैठक में ओडिशा से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने किसानों की बदहाली, धान की खरीद न होने, मंडियों के बंद रहने, घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने, राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, महिलाओं, बच्चियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराध, कोयला रॉयल्टी में 10 वर्षों से संशोधन न होने, कनेक्टिविटी की कमी और रिकॉर्ड स्तर की बेरोज़गारी का ज़िक्र किया।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रदूषण, एसआईआर और बढ़ती बेरोज़गारी जैसे मुद्दे उठाए हैं।आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य के अपमान का मुद्दा और एसआईआर के नाम पर वोट काटे जाने के आरोप भी उठाए।
वहीं, केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 में राज्य को उसका “उचित हिस्सा” मिलने की उम्मीद जताई। उन्होंने वित्त आयोग द्वारा की गई कटौतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे केरल को गंभीर नुकसान हुआ है और अब इसमें सुधार की आवश्यकता है।
सरकार ने मांगा सहयोग
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बजट सत्र के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के नियमों के तहत किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।रिजिजू ने कहा,“नियमों के अनुसार, चर्चा मुख्य रूप से बजट पर केंद्रित होनी चाहिए। बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी, जिसके बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर सभी दल भाग लेंगे। सरकार सुझावों का हमेशा स्वागत करेगी।”
सरकार इस सत्र के दौरान अपनी विधायी कार्यसूची को भी आगे बढ़ाएगी, जिसमें संसद के दोनों सदनों में लंबित विधेयकों पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया शामिल है।