नयी दिल्ली
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक सेवा भावना में निहित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की निरंतर प्रगति और समावेशी विकास के लिए समाज में आपसी सौहार्द और सहयोग की भावना बेहद आवश्यक है।
मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित ‘राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) गणतंत्र दिवस परेड शिविर’ के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है, लेकिन यही विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है। उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है।
उपराष्ट्रपति ने देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आज़ादी के बाद बिखरे भारत को एकता के सूत्र में बांधने का ऐतिहासिक कार्य किया। पटेल द्वारा प्रतिपादित एकता और सेवा के मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और देश की दिशा तय करने में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
युवाओं को संबोधित करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों से अपील की कि वे निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करें और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि सेवा की भावना न केवल समाज को मजबूत बनाती है, बल्कि युवाओं के चरित्र और नेतृत्व क्षमता का भी विकास करती है।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कोई एक दिन या एक सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की सामूहिक यात्रा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुशासित, देशभक्त और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है, जो अपने कर्तव्यों को समझें और समाज व राष्ट्र के प्रति ईमानदार रहें।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और सेवा की भावना के बिना विकास अधूरा है। जब नागरिक जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर राष्ट्र को प्राथमिकता देते हैं, तभी एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव होता है।
उपराष्ट्रपति ने अंत में एनएसएस के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन युवाओं को सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है और भविष्य के भारत के निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।




