सुक्खू ने एडीआर रिपोर्ट को बताया भाजपा की साजिश, कहा- छवि खराब करने की कोशिश

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-07-2026
 the BJP and said it was an attempt to tarnish his image.
the BJP and said it was an attempt to tarnish his image.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की उस रिपोर्ट को बुधवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें उत्तर भारत का सबसे अमीर मुख्यमंत्री बताया गया है। सुक्खू ने दावा किया कि यह उनकी छवि खराब करने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की साजिश है।
 
सुक्खू ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने 20 साल पहले 12 लाख रुपये में एक प्लॉट खरीदा था और उस पर मकान बनाया। समय के साथ संपत्ति की कीमत बढ़ी है और चुनावी हलफनामे में इसी संपत्ति का उल्लेख किया गया है।”
 
चुनावी और राजनीतिक सुधारों के क्षेत्र में काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था एडीआर की ताजा रिपोर्ट में देश के मौजूदा मुख्यमंत्रियों की संपत्ति का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कुल संपत्ति 7.81 करोड़ रुपये है और वह उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं।
 
सुक्खू ने भाजपा पर उन्हें उत्तर भारत का सबसे अमीर मुख्यमंत्री दिखाकर उनकी छवि खराब करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति मेहनत और ईमानदारी से संपत्ति बना सकता है। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
 
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई नयी संपत्ति नहीं जुड़ी है, बल्कि संपत्ति कम हुई है और अगले चुनाव के दौरान दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में यह दिखाई देगा।”
 
सुक्खू ने कहा, ‘‘यदि भाजपा को उनकी संपत्ति पर संदेह है तो वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इसकी जानकारी ले सकती है।’’ उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पहले भी जांच हो चुकी है।
 
उन्होंने दावा किया कि एडीआर रिपोर्ट में उनकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी अधूरी जानकारी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी एमए और एलएलबी डिग्री का उल्लेख नहीं किया गया और इसे सुधारा जाना चाहिए।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का कोई भी विधायक भाजपा में शामिल होना चाहता है तो वह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसे लोगों की जरूरत है जो उसकी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हों, ना कि ऐसे लोगों की जिन्हें खरीदा जा सके।