आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद राज्यों के कर राजस्व और कर उछाल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उच्च घरेलू खपत और बड़े सेवा क्षेत्र की मौजूदगी के कारण महाराष्ट्र को जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के कर राजस्व में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह कहा।
एक जुलाई, 2017 से लागू जीएसटी ने 17 तरह के कर और 13 उपकरों (सेस) को एकीकृत कर केंद्र और राज्यों की अलग-अलग कर दरों तथा कर संरचना को सरल बनाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद से माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) ने राज्यों के कर राजस्व और कर उछाल में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
कर उछाल से आशय अर्थव्यवस्था में वृद्धि के मुकाबले कर संग्रह क्षमता में तेज वृद्धि से है।
इंडिया रेटिंग्स की अर्थशास्त्री एवं निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि अध्ययन में शामिल 26 राज्यों का कर उछाल जीएसटी लागू होने के बाद वित्त वर्ष 2017-18 से 2025-26 के दौरान बढ़कर 2.9 हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 से 2016-17 के दौरान यह केवल 0.6 था।
रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद सबसे अधिक कर उछाल वाले पांच राज्य मणिपुर, नगालैंड, गोवा, महाराष्ट्र और सिक्किम रहे। वहीं, जीएसटी से पहले मेघालय, बिहार, नगालैंड, छत्तीसगढ़ और मणिपुर शीर्ष पांच राज्यों में शामिल थे।
इंडिया रेटंग्स ने कहा कि इसका प्रमुख कारण उत्पादन आधारित कर प्रणाली के स्थान पर उपभोग आधारित कर व्यवस्था का लागू होना, सेवा क्षेत्र को कर दायरे में शामिल करना तथा कर चोरी पर प्रभावी रोक लगना है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2012-13 से 2016-1717 के दौरान राज्यों का कर राजस्व 6.8 प्रतिशत बढ़कर 3.7 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।