आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बुधवार को लोकसभा में पारित हुए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है।
इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता पर बुरा असर पड़ता है।
इस संबंध में 2024 में लाए गए मूल कानून में संशोधन वाले इस विधेयक की मुख्य बातें निम्न हैं:
1. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को यह अधिकार देना कि वे प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों के मामलों में सुनवाई के लिए किसी भी सत्र अदालत को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के तौर पर नामित कर सकें।
2. यह प्रावधान करना कि ऐसी विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में कार्यवाही रोजाना के आधार पर हो और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी हो जाए।
3. केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए विशेष कार्य बल बनाने का अधिकार देना।
4. यह प्रावधान करना कि कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी हो जाए।
5. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को कानून के तहत मामलों को चलाने के लिए एक या अधिक विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देना।
6. किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ में अपील करने की व्यवस्था करना, और अपील स्वीकार होने की तारीख से तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना।
7. नए कानून के तहत, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल का कारावास काटना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
8. संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
साल 2024 में कानून तब लाया गया था जब सरकार को प्रश्नपत्र लीक के बड़े विवादों का सामना करना पड़ रहा था। इस कानून से पहले, केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में शामिल विभिन्न संस्थाओं द्वारा अपनाए गए अनुचित साधनों या किए गए अपराधों से निपटने के लिए कोई खास ठोस कानून नहीं था।