Supreme Court agrees to hear petitions related to the June 12 Air India plane crash
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर बुधवार को सहमति जताई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 12 जून को हुई एअर इंडिया विमान दुर्घटना की आधिकारिक जांच ने नागरिकों के जीवन, समानता और सत्य जानकारी तक पहुंच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
एअर इंडिया की बोइंग 787-8 उड़ान एआई171 अहमदाबाद से 12 जून को लंदन के गैटविक हवाई अड्डा जा रही थी। अहमदाबाद से रवाना होने के बाद कुछ ही पल बाद यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई। यह विमान मुख्य पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर उड़ा रहे थे।
बुधवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को जनहित याचिका दायर करने वाले गैर सरकारी संगठन 'सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन' के वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) ने याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया है।
भूषण ने बताया, ‘‘पूरा पायलट संघ कह रहा है कि बोइंग 787 विमान में कोई समस्या है जिसके कारण इसे उड़ान भरने से रोकना होगा।’’
प्रधान न्यायाधीश ने भूषण से कहा, ‘‘ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई आज समाप्त हो जाएगी। हम आपको जल्द ही अगली तिथि बताएंगे।’’
पिछले साल 13 नवंबर को, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि एअर इंडिया के मृत पायलट कैप्टन सभरवाल को एएआईबी की दुर्घटना जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट में दोषी नहीं ठहराया गया था।
शीर्ष अदालत ने कैप्टन सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल की याचिका पर केंद्र सरकार और नागरिक विमानन महानिदेशक (डीजीसीए) को भी नोटिस जारी किया था।
पुष्कराज सभरवाल और ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स’ ने एअर इंडिया की इस विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।