Students protesting against exam irregularities are not anti-social elements: Bombay High Court
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि एमपीएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध कर रहे छात्र असामाजिक तत्व नहीं हैं, तथा सरकारी भर्ती परीक्षाओं का निष्पक्ष आयोजन राज्य सरकार का दायित्व है।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा कि सरकार को यह भरोसा उत्पन्न करना होगा कि जब भी परीक्षाएं होंगी, वे ‘‘निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी भी तरह की गड़बड़ी से मुक्त’’ होंगी।
अदालत पुणे के निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और उनसे जुड़े विवादों को लेकर शहर में छात्रों और अन्य लोगों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ दायर की गई थी।
पीठ ने कहा कि सरकार को लोगों, खासकर छात्रों का ऐसी परीक्षाओं में भरोसा बहाल करने के लिए ईमानदार कोशिश करनी होगी।
इसने कहा कि परेशान छात्रों को आंदोलन करने का अधिकार है।
अदालत ने कहा, ‘‘अगर उन्हें (छात्रों को) मौका नहीं मिलता और उन्हें लगता है कि कोई गड़बड़ी हुई है, तो उन्हें विरोध करने का अधिकार है। क्योंकि उन्होंने पढ़ाई में घंटों लगाए हैं।’’