स्टील्थ युद्धपोत महेंद्रगिरि को 11 जुलाई को नौसेना में किया जाएगा शामिल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-07-2026
Stealth warship Mahendragiri to be inducted into Navy on July 11
Stealth warship Mahendragiri to be inducted into Navy on July 11

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों सहित उन्नत हथियारों तथा अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली से लैस स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत महेंद्रगिरि को 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए और मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित ‘महेंद्रगिरि’ परियोजना 17ए के तहत नीलगिरि श्रेणी का छठा युद्धपोत है। उन्होंने बताया कि यह वायु रोधी, सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि यह समुद्री सुरक्षा, शक्ति प्रदर्शन, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), खोज एवं बचाव तथा समुद्र में लंबे समय तक तैनाती जैसे अभियानों के लिए भी उपयुक्त है।
 
अधिकारी ने कहा, ‘‘यह युद्धपोत स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियारों एवं सेंसरों से लैस है। इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता, व्यापक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली तथा एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली शामिल है।’’
 
उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक स्टील्थ विशेषताओं, बेहतर मजबूती, कम रडार पहचान क्षमता और उच्च स्तर की स्वचालन तकनीक से युक्त इस युद्धपोत में आधुनिक ‘कम्बाइंड डीजल ऑर गैस’ (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिससे यह समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला में उच्च गति और लंबी परिचालन क्षमता प्रदान करता है।
 
नौसेना ने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित महेंद्रगिरि सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
 
नौसेना के अनुसार, इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है और यह दृढ़ता, शक्ति और अडिग संकल्प का प्रतीक है।
 
नौसेना ने कहा कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों की रक्षा करते हुए एक “प्रभावी बल गुणक” के रूप में कार्य करेगा और सुरक्षित, स्थिर तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देगा।
 
यह युद्धपोत 30 अप्रैल को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में नौसेना को सौंपा गया था। इसके निर्माण में भारतीय उद्योगों के व्यापक नेटवर्क ने योगदान दिया है, जिनमें कई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं। इससे रोजगार सृजन के साथ देश के रक्षा औद्योगिक आधार को भी मजबूती मिली है।
 
नौसेना ने कहा कि इस युद्धपोत का सेवा में शामिल होना परियोजना 17ए कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस कार्यक्रम के तहत बने जहाजों में परियोजना 17 (शिवालिक श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर प्रणाली लगी हुई है।
 
नीलगिरि श्रेणी (परियोजना 17ए) का पांचवां जहाज स्टील्थ युद्धपोत ‘दुनागिरी’, अत्याधुनिक हथियार एवं सेंसर प्रणालियों से लैस है। उसे 21 जून को कोलकाता में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
 
युद्धपोत दो अन्य अग्रिम पंक्ति के प्लेटफॉर्म-सर्वेक्षण पोत (लार्ज) ‘संशोधक’ और अर्नाला श्रेणी के चौथे पनडुब्बी रोधी ‘वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ ‘अग्रय’ के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में नौसेना में शामिल किया गया था।