नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई 8 जनवरी तक स्थगित कर दी है। यह याचिका वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत दायर की गई थी।
पीठ के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले ने बुधवार को मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और कहा कि बृहस्पतिवार को इस पर सुनवाई होगी। वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए।
इस याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक की हिरासत अवैध और मनमानी है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। याचिका में कहा गया है कि हिरासत आदेश पुराने प्राथमिकी, अस्पष्ट आरोप और अटकलबाजी भरे दावों पर आधारित है, और इसके कथित आधारों का किसी भी तरह से वांगचुक के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोपों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने 24 नवंबर को याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसके बाद सुनवाई स्थगित हुई। अदालत ने पहले 29 अक्टूबर को याचिका पर दोनों पक्षों से जवाब मांगा था।
26 सितंबर को लद्दाख में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद वांगचुक को रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था। इन हिंसक प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई और लगभग 90 लोग घायल हुए। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
याचिका में कहा गया कि यह सत्ता का मनमाना प्रयोग है, जो संवैधानिक स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। आंगमो ने यह भी कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक के कार्यों या बयानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने बताया कि वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट रूप से हिंसा की निंदा की और कहा कि हिंसा लद्दाख की वर्षों की शांति और प्रयासों के विफल होने का कारण बनेगी। याचिका में अनुरोध किया गया है कि अदालत इस हिरासत आदेश को तुरंत रद्द करे, ताकि वांगचुक के अधिकार सुरक्षित रहें।