Schools and colleges in Manipur closed until August 22.
इंफाल
मणिपुर में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 20 से 22 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया है। शिक्षा विभाग की ओर से बुधवार को जारी आदेश के मुताबिक, यह बंदी गुरुवार 20 अगस्त से शनिवार 22 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।
सरकार के आदेश के दायरे में राज्य के सभी स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इनमें माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध स्कूलों के अलावा अन्य बोर्डों से जुड़े संस्थान भी शामिल हैं।
इसके साथ ही सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों को भी तीन दिनों के लिए बंद रखने का फैसला किया गया है।
कानून-व्यवस्था को देखते हुए फैसला
मणिपुर सरकार के शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा कि राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने की मंजूरी दी है।
आदेश स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, वयस्क शिक्षा और SCERT विभाग के आयुक्त-सह-सचिव निंगथौजाम जेफ्री की ओर से जारी किया गया।
शिक्षा विभाग ने सभी डिप्टी कमिश्नरों, जोनल शिक्षा अधिकारियों और संबंधित निदेशकों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों तक आदेश पहुंचाने का निर्देश दिया है, ताकि बंदी के फैसले का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
NRC को लेकर विरोध तेज
शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला ऐसे समय आया है जब मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
रविवार को Campaign for Just and Fair Delimitation (JFD) ने राज्य के कई हिस्सों में आंदोलन को और तेज किया। संगठन की अपील पर रविवार रात विभिन्न स्थानों पर मशाल जुलूस निकाले गए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि चल रही जनगणना प्रक्रिया से पहले NRC को अपडेट किया जाए। प्रदर्शन के दौरान कई इलाकों में लोगों ने जुलूस निकालकर इस मांग को उठाया।
इन इलाकों में निकले मार्च
JFD की अपील के बाद प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नरों के कार्यालयों की ओर मार्च किया। उरीपोक-कांगचुप रोड, तिद्दिम रोड, कोंगबा रोड और खुरई-लामलोंग सहित कई मार्गों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा कि जब तक NRC को अपडेट नहीं किया जाता और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) का पुनर्वास नहीं किया जाता, तब तक जनगणना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
इस आंदोलन को लेकर विभिन्न संगठनों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया गया था। इनमें मीरा पैबी समूह भी शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
मशाल जुलूस और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। अधिकारियों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
JFD ने राज्य के घाटी और पहाड़ी जिलों में सक्रिय नागरिक संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। संगठन की मुख्य मांग है कि जनगणना से पहले NRC को अपडेट किया जाए।
इस बीच, शैक्षणिक संस्थानों को तीन दिनों के लिए बंद रखने के सरकारी फैसले से छात्रों और शिक्षण संस्थानों की नियमित गतिविधियां प्रभावित होंगी। राज्य में कानून-व्यवस्था और NRC से जुड़ा विरोध आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।