SC rules armed forces framework disadvantaged women officers, orders PC, pension benefits
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह माना है कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में करियर में आगे बढ़ने और विकास के मामले में जो सिस्टमैटिक ढांचा है, उसने महिला अधिकारियों को नुकसान पहुंचाया है। उन्हें परमानेंट कमीशन (PC) का उचित मौका नहीं दिया गया, जिससे उन्हें सेवा के दौरान और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले बेहतर फायदों से वंचित रहना पड़ा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाया कि सेना की जिन महिला अधिकारियों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है (इस मामले की सुनवाई के दौरान), उन्हें 20 साल की योग्य सेवा पूरी की हुई माना जाएगा।
उन्हें 1 जनवरी, 2025 से बकाया राशि के साथ पूरी पेंशन मिलेगी। साथ ही, बेंच ने उन महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (PC) देने का निर्देश दिया जो अभी भी सेवा में हैं और जिन्होंने 60% का कट-ऑफ पूरा किया है, बशर्ते उन्हें ज़रूरी मंज़ूरी मिल जाए। नौसेना के मामले में, कोर्ट ने उन अधिकारियों के अधिकारों की रक्षा की जिन्हें पहले ही PC मिल चुका था। साथ ही, PC के लिए पात्रता का दायरा कुछ खास श्रेणियों की महिलाओं और कुछ पुरुष अधिकारियों तक भी बढ़ाया, जिन्हें पहले इस दायरे से बाहर रखा गया था। वायु सेना के मामले में, कोर्ट ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कमियों को स्वीकार किया। जिन अधिकारियों पर विचार तो किया गया था, लेकिन जिनका चयन नहीं हुआ था, उन्हें एक बार के उपाय के तौर पर पेंशन संबंधी लाभ देने का फैसला किया। वहीं, अन्य अधिकारियों को कानूनी उपचार (remedies) अपनाने की अनुमति दी।
वायु सेना के मामले में, कोर्ट ने आगे कहा कि प्रदर्शन के मापदंड (benchmarks) जल्दबाज़ी में लागू किए गए थे, जिससे चयन प्रक्रिया दूषित हो गई। वहीं, नौसेना के मामले में, कोर्ट ने पाया कि मूल्यांकन के मानदंडों और रिक्तियों की जानकारी देने में पारदर्शिता की कमी थी। कोर्ट ने अपना फैसला इस निष्कर्ष पर आधारित किया कि पूरी मूल्यांकन प्रणाली ही संरचनात्मक रूप से पक्षपातपूर्ण थी। कोर्ट ने पाया कि 'वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट' (ACRs) इस धारणा के आधार पर लिखी जाती थीं कि महिलाओं का करियर लंबा नहीं होगा, जिसके चलते उन्हें लापरवाहीपूर्ण या अनुचित ग्रेडिंग दी जाती थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि महिलाओं को "विशेष नियुक्तियों" (criteria appointments) और "करियर को बेहतर बनाने वाले कोर्स" से वंचित रखा जाता था, क्योंकि वे पहले PC के लिए पात्र नहीं थीं। इसका सीधा असर उनकी योग्यता (merit) पर पड़ा, जब वे बाद में PC के लिए पात्र बनीं।