आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत के महापंजीयक (आरजीआई) ने जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को उन गांवों, बस्तियों और समुदायों की पहचान करने का निर्देश दिया है जो खतरों या धमकियों जैसे कारकों को लेकर संवेदनशील हैं और जिससे जनगणना के स्वतंत्र संचालन में बाधा आ सकती है। उन्होंने इसके लिए संवेदनशीलता से मानचित्रण करने का भी निर्देश दिया है।
आरजीआई ने इस संभावना को ध्यान में रखा कि कुछ क्षेत्र दुर्गम होने या मौजूदा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण जनगणना से बाहर रह सकते हैं।
इसमें अधिकारियों से राजस्व संबंधी ग्रामवार प्रक्रिया करने को कहा गया है ताकि जनगणना के स्वतंत्र संचालन में किसी भी प्रकार के खतरे, धमकी या हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील गांवों/बस्तियों/आवासों और लोगों के वर्गों की पहचान की जा सके।
आरजीआई ने यह भी निर्देश दिया है कि वर्तमान में जारी आवास जनगणना के दौरान सैन्य प्रतिष्ठानों जैसे विशेष क्षेत्रों को शामिल नहीं किया जाएगा।
जनगणना के लिए अखिल भारतीय हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया गया है।
भारत के महापंजीयक मृत्युंजय नारायण सिंह द्वारा हाल में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी एक निर्देश में कहा गया, ‘‘प्रभारी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों का व्यापक दौरा करके और स्थानीय ग्राम अधिकारियों - पटवारियों, लेखपालों, तलाटियों और ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ परामर्श करके यह कवायद करेंगे।’’