उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में अवैध रूप से रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जांच अभियान और गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में रहने और पहचान छिपाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नुमाइश पुल के पास बृहस्पतिवार को की गई। पुलिस अधीक्षक (नगर) अभिषेक प्रताप अजेया ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर जांच टीम ने आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।
आरोपी की पहचान पाकिस्तान के न्यू कराची निवासी वसीद इरशाद के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि उसकी मां बिलकिस फातिमा को दीर्घकालिक वीजा प्राप्त था, लेकिन वर्ष 2012 में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बावजूद आरोपी लंबे समय से भारत में रह रहा था।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि वसीद इरशाद ने दीर्घकालिक वीजा के लिए आवेदन किया था, जो अभी तक लंबित था। हालांकि, जांच के दौरान उसके दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि उसके पास मौजूद आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट सभी “सैयद वसीद अली” नाम से जारी किए गए थे, जो पूरी तरह से फर्जी पहचान पर आधारित थे।
दस्तावेजों के अनुसार, उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के सुशीला विहार का निवासी दिखाया गया था, जबकि वास्तविकता में वह पाकिस्तानी नागरिक है। यह खुलासा होने के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है, क्योंकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी विदेशी नागरिक का लंबे समय तक देश में रहना गंभीर सुरक्षा प्रश्न खड़ा करता है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज किसने और कैसे उपलब्ध कराए।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं। साथ ही, आरोपी के भारत में रहने के दौरान उसकी गतिविधियों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
यह घटना न केवल प्रशासनिक सतर्कता की जरूरत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि पहचान दस्तावेजों की सत्यता की जांच कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं।