एमयूडीए भूमि आवंटन मामले में सिद्धरमैया को राहत, अदालत ने लोकायुक्त की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार की

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 28-01-2026
Relief for Siddaramaiah in MUDA land allotment case, court accepts Lokayukta's closure report
Relief for Siddaramaiah in MUDA land allotment case, court accepts Lokayukta's closure report

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली


 
 जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनकी पत्नी बीएम पार्वती को बड़ी राहत देते हुए एमयूडीए भूमि आवंटन मामले में लोकायुक्त पुलिस की ओर से दायर उस ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को बुधवार को स्वीकार कर लिया, जिसमें दोनों को ‘क्लीन चिट’ दी गई है।
 
न्यायाधीश संतोष गजानन भट की अदालत ने कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें एमयूडीए भूमि आवंटन मामले में लोकायुक्त पुलिस की ओर से दायर ‘बी रिपोर्ट’ (क्लोजर रिपोर्ट) को चुनौती दी गई थी।
 
अदालत ने मामले में सिद्धरमैया के बहनोई मल्लिकार्जुन स्वामी और मूल भूमि मालिक जे देवराज को भी राहत प्रदान की। हालांकि, उसने अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति दी और अगली सुनवाई नौ फरवरी के लिए तय की।
 
अदालत ने अपने फैसले में कहा, “जांच अधिकारी की ओर से आरोपी-1 सिद्धारमैया, आरोपी-2 बीएम पार्वती, आरोपी-3 मल्लिकार्जुन स्वामी और आरोपी-4 जे देवराज के खिलाफ दायर की गई ‘बी रिपोर्ट’ को स्वीकार किया जाता है।”
 
हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह से बंद नहीं हुई है।
 
अदालत ने कहा, “जांच अधिकारी की ओर से अन्य आरोपियों के खिलाफ की जा रही जांच जारी रहेगी। जांच अधिकारी जांच पूरी होने पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करेंगे।”
 
न्यायमूर्ति भट ने जांच अधिकारी के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की शिकायतकर्ता की अपील भी खारिज कर दी।
 
केंद्रीय एजेंसी की भूमिका पर अदालत ने कहा, “यह माना जाता है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पीड़ित व्यक्तियों के रूप में सीमित हद तक मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार है।”
 
अदालत ने प्रशासनिक अनुपालन का निर्देश देते हुए कहा, “कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि वह सीलबंद लिफाफे में रखी सीडी फाइलें और अंतिम रिपोर्ट की मसौदा प्रति उचित पहचान के बाद संबंधित जांच अधिकारी को लौटा दे।”
 
पिछले साल फरवरी में लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में सिद्धरमैया, पार्वती और दो अन्य आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ देते हुए कहा था कि सबूतों की कमी के कारण उन पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं।
 
सिद्धरमैया, पार्वती, स्वामी, देवराज और अन्य लोग लोकायुक्त पुलिस की ओर से 27 सितंबर 2024 को अदालत के निर्देश पर दर्ज प्राथमिकी में नामजद थे।
 
स्वामी ने देवराज से जमीन खरीदी थी और पार्वती को उपहार में दी थी।