आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने कहा कि बैंकों को रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) को ऋण देने की अनुमति देने के आरबीआई के प्रस्ताव से किराये से आय वाली संपत्तियों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुंच आसान होगी और ऐसे न्यासों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि इस कदम से रीट के विकास में मदद मिलेगी और इसमें निवेश करने वालों (इकाई धारकों) की आय में वृद्धि होगी।
शुक्रवार को, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए वित्तपोषण के दायरे को व्यापक बनाने के उद्देश्य से कुछ विवेकपूर्ण रक्षोपाय के साथ बैंकों को रीट को ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया।
रीट ऐसे निवेश माध्यम हैं जो आय उत्पन्न करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों के मालिक होते हैं या उनका संचालन करते हैं। इससे निवेशक सीधे संपत्ति खरीदे बिना ही उससे होने वाली आय में हिस्सा पाने में सक्षम होते हैं।
वर्तमान में, भारत में पांच सूचीबद्ध रीट हैं ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बैसी ऑफिस पार्क्स रीट, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट, नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट और नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट।
नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट के पास किराये से आय वाली रिटेल रियल एस्टेट संपत्तियों का पोर्टफोलियो है, जबकि अन्य चार रीट के पास कार्यालय संपत्तियां हैं।
एम्बैसी रीट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित शेट्टी ने कहा, "यह नीतिगत कदम रीट के लिए दीर्घकालिक और स्थिर वित्तपोषण तक पहुंच बढ़ाएगा। यह पारंपरिक पूंजी बाजार वित्तपोषण का पूरक होगा और आय पैदा करने वाले रियल एस्टेट के लिए वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करेगा।"