आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने और ग्राहकों की सुविधा के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के बीच समन्वय की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है।
इस पहल का मतलब है कि अब ग्राहकों को अपनी वित्तीय जानकारी को देखने या साझा करने के लिए अलग-अलग ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ मंच पर जाने की जरूरत नहीं होगी। अगर आपकी बैंक की जानकारी एक वित्तीय सूचना प्रदाता के पास है और निवेश से जुड़ी जानकारी दूसरे के पास है, तो आप अपनी पसंद के किसी एक एनबीएफसी-‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के जरिये दोनों तरह की जानकारी हासिल कर सकेंगे।
‘अकाउंट एग्रीगेटर’ (एए) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमन के तहत काम करने वाली ऐसी व्यवस्था और मध्यस्थ इकाई है, जो ग्राहक की सहमति से विभिन्न संस्थानों के बीच उसकी वित्तीय जानकारी को सुरक्षित और डिजिटल तरीके से साझा करने की सुविधा देती है।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा, ‘‘ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के बीच समन्वय की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है। इससे ग्राहक अपनी पसंद के किसी भी एनबीएफसी-एए के माध्यम से अलग-अलग वित्तीय सूचना प्रदाताओं से अपनी वित्तीय जानकारी हासिल कर उसे साझा कर सकेंगे।’’
आरबीआई के बयान के अनुसार, इसके अलावा, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमन के तहत आने वाली डिपॉजिटरी को एनबीएफसी-एए के माध्यम से अपने एकीकृत खाता विवरण (सीएएस) में बैंक जमा खातों से जुड़ी जानकारी शामिल करने की सुविधा दी जा रही है। इससे डीमैट खाताधारक अपने डीमैट खाते में रखी प्रतिभूतियों और बैंक जमा खातों की जानकारी एक ही जगह सीएएस में देख सकेंगे।