पुरी रथयात्रा: रथ निर्माण कार्य बढ़इयों के प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-06-2026
Puri Rath Yatra: Chariot construction work briefly halted due to carpenters' protest
Puri Rath Yatra: Chariot construction work briefly halted due to carpenters' protest

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
ओडिशा के पुरी में वार्षिक रथयात्रा के लिए बनाये जा रहे तीनों रथों का निर्माण कार्य बुधवार को लगभग चार घंटे तक रुका रहा, क्योंकि बढ़इयों ने निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई लकड़ी के बचे हुए टुकड़ों को घर ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में प्रदर्शन किया।

अक्षय तृतीया से शुरू हुआ रथ निर्माण कार्य पिछले 58 दिन से जारी है।
 
इस कार्य में लगे पारंपरिक बढ़ई समुदाय ‘महाराणा सेवक’ के सदस्यों ने काम बंद कर दिया और मंदिर के अधिकार अभिलेख (आरओआर) के तहत उन्हें प्राप्त अधिकारों को जारी रखने की मांग की।
 
आरओआर के अनुसार, बढ़इयों को तीनों रथों -भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’— के निर्माण के बाद बची हुई लकड़ी के टुकड़े लेने का अधिकार प्राप्त है और यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
 
प्रदर्शनकारी बढ़इयों ने आरोप लगाया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने हाल में एक निर्देश जारी कर उन्हें बची हुई लकड़ी को घर ले जाने से रोक दिया।
 
बढ़ई नृसिंह महापात्र ने कहा, ‘‘रथ निर्माण के बाद बची हुई लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को लेने का हमें अधिकार है, लेकिन मंदिर के अधिकारियों ने हमें रोक दिया है और हमारे काम में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं।’’
 
एसजेटीए के प्रशासक (नीति) प्रियरंजन प्रुस्ती ने कहा कि तीनों रथों के मुख्य बढ़इयों के साथ चर्चा के बाद इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।
 
उन्होंने कहा, “प्रशासन द्वारा यह सूचित किये जाने के बाद कि लकड़ी के बचे हुए टुकड़ों के बदले उन्हें धनराशि दी जायेगी, काम फिर से शुरू हो गया है।’’
 
उन्होंने कहा कि प्रशासन अगले वर्ष रथ निर्माण में उपयोग के लिए बची हुई लकड़ी को संरक्षित करने पर विचार कर रहा था, जिसके कारण यह प्रतिबंध लगाया गया।
 
बढ़इयों ने कहा कि परंपरागत रूप से वे केवल लकड़ी के छोटे बचे हुए टुकड़े घर ले जाते थे, जिनकी लंबाई आमतौर पर चार फुट से कम और चौड़ाई तीन फुट से कम होती थी।
 
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘प्रशासन का आदेश मनमाना और अस्वीकार्य है।’’