आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शनिवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद पर बने रहना सत्ता के लिए उनकी ‘‘निर्लज्ज लालसा’’ का परिचायक तथा लाखों छात्रों और उनके परिवारों का अपमान है।
मुख्य विपक्षी दल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के पेपर लीक और ओएसएम से जुड़े विवाद को लेकर निरंतर उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक अंग्रेजी दैनिक की खबर का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हफ्तों तक किसी भी गलत काम से इनकार करने और यह दावा करने के बाद कि उसके कोएम्पट (कॉन्ट्रेक्टर) के ‘ऑन मार्क पोर्टल’ पर सबकुछ ठीक है, सीबीएसई को आखिरकार कोएम्पट की अक्षमता को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी शुरुआत डेटा उल्लंघन की सार्वजनिक स्वीकृति के साथ हुई और यह 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी द्वारा साइबर सुरक्षा कमजोरियों की रिपोर्ट किए जाने के महीनों बाद हुआ।’’
रमेश ने कहा कि अब यह और भी स्पष्ट हो गया है, क्योंकि रिपोर्ट सामने आ रही हैं कि सीबीएसई ने आईआईटी विशेषज्ञों और स्वयं निसर्ग द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग करके 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए अपना खुद का प्लेटफॉर्म बनाया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मंत्री प्रधान को इन गलतियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
रमेश ने दावा किया, ‘‘यह सब उनकी निगरानी में, या तो उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण, या उनकी अपनी अक्षमता और शासन के प्रति उदासीन रवैये के कारण हुआ है। किसी भी तरह, उनका पद पर बने रहना लाखों छात्रों और उनके परिवारों का अपमान है।’’
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा कि मंत्री प्रधान समझौतावादी मंत्रालय चलाने वाले एक ‘‘अहंकारी’’ और ‘‘अक्षम’’ व्यक्ति के रूप में बेनकाब हो गए हैं।