आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस में जारी सत्ता की खींचतान उस समय और तेज हो गई जब उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक एक निजी होटल में एकत्र हुए और अपने नेता को राज्य के शीर्ष पद पर बिठाने की रणनीति पर चर्चा की।
मगाडी के विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने यह बैठक आयोजित की, जहां ‘‘सत्ता-साझाकरण को लेकर जारी खींचतान को समाप्त करने’’ पर विचार-विमर्श किया गया।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार रात को लगभग ‘‘समान विचारधारा वाले 40 विधायक’’ होटल में जुटे और शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद पर आसीन कराने के लिए पैरवी करने का निर्णय लिया।
शिवकुमार के वफादार बालकृष्ण ने संवाददाताओं से कहा कि उनका जन्मदिन शनिवार को है। ‘‘मैं शुक्रवार सुबह से यहां (बेंगलुरु) नहीं रहूंगा, इसलिए मैंने बृहस्पतिवार को समान विचारधारा वाले लोगों को मिलने के लिए एक साथ आमंत्रित किया। हमने सभी को बुलाया और यह बैठक की।’’
चर्चा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘यदि पार्टी में ऐसी ही स्थिति रही तो भविष्य में हमारे लिए कठिनाई होगी। (शीर्ष नेतृत्व को) उन्हें इस मुद्दे (नेतृत्व विवाद) को सुलझाना चाहिए। हमने तय किया है कि हम उनसे ऐसा करने का आग्रह करेंगे।’’
दिल्ली जाने के सवाल पर बालकृष्ण ने कहा कि मामला राष्ट्रीय राजधानी जाने का नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आलाकमान को कर्नाटक में हो रही घटनाओं की जानकारी है।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाते हैं तो उन्हें नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार सवालों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे क्षेत्रों में यही चर्चा होती है और इससे हम असहज महसूस करते हैं। हमें शीर्ष नेतृत्व से इस पर विराम लगाने का अनुरोध करना चाहिए।’’
बालकृष्ण ने कहा कि नेताओं को अलग-अलग बुलाने से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि जब विधायक मिलते हैं तो स्वाभाविक रूप से इस विषय पर बातचीत होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई विधायकों का मानना है कि जब तक यह मुद्दा सुलझेगा नहीं, तब तक हमारे लिए स्थिति कठिन रहेगी और भविष्य अनिश्चित रहेगा।’’