श्रीनगर
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद मियां अल्ताफ अहमद ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक हालात अनिश्चित बने हुए हैं और जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए सरकार को गंभीर प्रयास करने चाहिए।
मियां अल्ताफ अहमद ने विशेष रूप से बेरोजगारी और स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए इन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से वह संतुष्ट नहीं हैं और जम्मू-कश्मीर के लोगों की चिंताओं को दूर करना सभी की जिम्मेदारी है।
शुक्रवार को एएनआई से बातचीत में मियां अल्ताफ अहमद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आज जो राजनीतिक परिस्थितियां हैं, उनसे वह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिति अनिश्चित है और ऐसे हालात में कोई भी व्यक्ति संतुष्ट नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की इच्छाओं और उम्मीदों को समझते हुए उन्हें पूरा करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, बेरोजगारी इस समय जम्मू-कश्मीर के सामने प्रमुख समस्याओं में से एक है, जिस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
एनसी सांसद ने राजौरी और पुंछ के स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई दिक्कतें हैं और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
मियां अल्ताफ अहमद ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की एक अन्य प्रमुख मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां का हर व्यक्ति चाहता है कि जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिले। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए और सरकारी योजनाओं एवं फैसलों का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।
इससे पहले सोमवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने बताया था कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार के बीच राज्य के दर्जे सहित कई मुद्दों पर बातचीत चल रही है।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ लगातार संवाद बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार के बीच राज्य का दर्जा तथा बिजनेस रूल्स समेत कई विषयों पर चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि जम्मू-कश्मीर में करीब दो वर्षों से एडवोकेट जनरल का पद खाली है। इसके अलावा आरक्षण से जुड़ा मामला भी केंद्र सरकार के समक्ष जवाब की प्रतीक्षा में है।
उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, आरक्षण के मुद्दे पर कैबिनेट की ओर से केंद्र सरकार को भेजे जाने वाला जवाब तैयार हो चुका है, लेकिन अभी तक उसे भारत सरकार को नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनको लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की थी।
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अनिश्चितता, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं और राज्य के दर्जे की मांग जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे में मियां अल्ताफ अहमद का बयान सरकार पर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और जमीनी समस्याओं के समाधान की दिशा में तेजी से कदम उठाने का दबाव बढ़ाता है।