पीएम मोदी बनास डेयरी के UHT प्लांट में आधुनिक भंडारण प्रणाली का करेंगे उद्घाटन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 27-10-2026
PM Modi to inaugurate modern storage system at Banas Dairy’s UHT plant in Gujarat's Palanpur
PM Modi to inaugurate modern storage system at Banas Dairy’s UHT plant in Gujarat's Palanpur

 

गांधीनगर (गुजरात) 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पालनपुर में बनास डेयरी के UHT प्लांट वेयरहाउस में एक आधुनिक स्टोरेज सिस्टम का उद्घाटन करेंगे। 31.14 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस 'ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम' (ASRS) में डेयरी उत्पादों को स्टोर करने और व्यवस्थित करने के लिए मशीनों का उपयोग किया जाएगा। गुजरात CMO के अनुसार, इस वेयरहाउस में 9 स्तरों तक फैले स्टील रैक हैं और इसमें 11,000 पैलेट स्टोर करने की क्षमता है। ASRS एक ऐसा सिस्टम है जिसमें क्रेन, शटल, रोबोट और कन्वेयर जैसी मशीनों का इस्तेमाल करके सामान को स्टोर किया जाता है और जरूरत पड़ने पर उसे वापस निकाला जाता है। एक विशेष सॉफ्टवेयर वेयरहाउस की इन्वेंट्री पर नज़र रखता है और ऑर्डर प्रोसेसिंग को तेज़ बनाता है, जिससे काम में सटीकता आती है और कुल कार्यक्षमता में सुधार होता है।
 
पालनपुर वेयरहाउस में लगे इस 'मल्टी-डीप ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम' (ASRS) में 'मदर-चाइल्ड' शटल की व्यवस्था है। 'मदर' शटल, 'चाइल्ड' शटल को रैक सिस्टम के भीतर तय लेन तक ले जाती है। वहां से 'चाइल्ड' शटल रैक के अंदर जाकर पैलेट और बॉक्स को उनकी निर्धारित जगहों पर रखती है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें वापस निकाल लाती है। पूरी तरह से ऑटोमेटेड होने के कारण इसमें इंसानी दखल बहुत कम होता है, गलतियों की संभावना घटती है और काम की गति तेज़ हो जाती है।
 
पालनपुर में 2015 में स्थापित UHT (अल्ट्रा हीट ट्रीटमेंट) प्लांट में, दूध और डेयरी उत्पादों को एक विशेष थर्मल ट्रीटमेंट प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है। इससे ये उत्पाद बिना रेफ्रिजरेशन या प्रिजर्वेटिव्स के भी छह महीने तक ताज़ा बने रहते हैं। इस वेयरहाउस का इस्तेमाल ऐसे ही UHT उत्पादों को स्टोर करने के लिए किया जाएगा, जिनमें 'काउ-बफेलो गोल्ड', 'हाई प्रोटीन लस्सी', 'एप्पल ट्रू', 'टी स्पेशल' आदि शामिल हैं।
 
पालनपुर का यह UHT प्लांट रोज़ाना 5.5 लाख लीटर दूध प्रोसेस करता है, जिससे सालाना 1,050 करोड़ रुपये का राजस्व (2025-26 के आंकड़ों के अनुसार) प्राप्त होता है। इस प्लांट के उत्पादों—जैसे दूध, 'ट्रू', मसालेदार छाछ, हाई-प्रोटीन ड्रिंक्स और घी—को भारत के बाज़ारों में बेचा जाता है, साथ ही इन्हें सिंगापुर, मालदीव, UAE और मलेशिया जैसे देशों में निर्यात भी किया जाता है। औसतन, यह प्लांट अभी अपनी अधिकतम क्षमता के लगभग 90 प्रतिशत पर काम कर रहा है।
 
पारंपरिक गोदामों में, पैकिंग लाइन से आने वाले पैलेट को फोर्कलिफ्ट की मदद से इधर-उधर ले जाया और व्यवस्थित किया जाता है। हर पैलेट कहाँ रखा गया है, इसका रिकॉर्ड रखना ज़रूरी होता है, ताकि सामान भेजने (डिस्पैच) के समय उसे आसानी से निकाला जा सके। हालाँकि, जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ता है, पारंपरिक गोदामों की कमियाँ सामने आने लगती हैं। फोर्कलिफ्ट को चलाने के लिए चौड़े रास्ते चाहिए होते हैं, और सामान को एक के ऊपर एक रखने (स्टैकिंग) की ऊँचाई सीमित होने के कारण ज़्यादा जगह घेरती है। हज़ारों पैलेट के बीच किसी खास बैच को ढूँढ़ने में बहुत समय लग सकता है और इसमें मानवीय गलती (human error) होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
 
नया ASRS (ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम) मशीनरी और कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करके पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेट कर देता है। ऑटोमेटेड मशीनें पैकिंग लाइन से आने वाले पैलेट को हाई-डेंसिटी रैकिंग सिस्टम में तय जगहों पर पहुँचा देती हैं, और हर पैलेट की सटीक लोकेशन कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाती है। जब किसी खास प्रोडक्ट या बैच की ज़रूरत होती है, तो सिस्टम अपने आप उसे ढूँढ़ लेता है और डिस्पैच एरिया तक पहुँचा देता है। इससे कर्मचारियों को पैलेट ढूँढ़ने के लिए गोदाम के अंदर जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। पैकिंग लाइन से लेकर अंतिम डिस्पैच तक, हर प्रोडक्ट को उसके पूरे सफर के दौरान ट्रैक किया जा सकता है। चाहे किसी बैच की जाँच करनी हो या उसे बाज़ार भेजना हो, उसका सटीक स्टेटस तुरंत पता चल जाता है।
 
ASRS (ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम) के आने से गोदाम की भूमिका में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले, गोदाम मुख्य रूप से तैयार माल को रखने की जगह होते थे। गोदाम की क्षमता और काम करने की गति ही यह तय करती थी कि प्लांट बाज़ार में कितना माल भेज सकता है। ASRS तकनीक के साथ, गोदाम अब एक ऐसे ऑटोमेटेड और डेटा-आधारित सिस्टम में बदल रहा है, जो पैकिंग लाइन को सीधे बाज़ार से जोड़ता है।
 
पालनपुर में लगा ASRS, बनास डेयरी में चल रहे बड़े तकनीकी बदलाव का एक अहम हिस्सा है। अब तक, ऑटोमेशन का ज़्यादातर फ़ोकस दूध की प्रोसेसिंग और पैकिंग पर था। अब इस नए सिस्टम के ज़रिए, इसे वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन ऑपरेशंस तक भी बढ़ाया जा रहा है।
 
1969 में स्थापित, बनास डेयरी 1,505 ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों के ज़रिए 4.5 लाख से ज़्यादा पशुपालक किसानों से रोज़ाना औसतन 83 लाख लीटर दूध इकट्ठा करती है। वर्ष 2024-25 में, संगठन ने ₹21,200 करोड़ से अधिक का वार्षिक कारोबार दर्ज किया, जिसमें से कुल राजस्व का 82 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को पारिश्रमिक के रूप में वापस दिया गया। बनासकांठा क्षेत्र में की गई ये पहल, पशुपालन और कृषि के क्षेत्र में स्मार्ट और विज्ञान-आधारित तरीकों को अपनाने की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।