बंगाल चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग, SC में याचिका

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-04-2026
Plea in Supreme Court Demands Removal from Bengal Election Duty
Plea in Supreme Court Demands Removal from Bengal Election Duty

 

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच सियासी माहौल और गर्म हो गया है। एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग उठाई गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में उनकी भूमिका निष्पक्ष नहीं रही है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

यह याचिका मंगलवार देर रात ई-फाइल की गई, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला दिया गया है। यह अनुच्छेद नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। याचिका में दावा किया गया है कि अजय पाल शर्मा, जिन्हें उनके एनकाउंटर रिकॉर्ड के चलते “यूपी का सिंघम” कहा जाता है, चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर अपेक्षित तटस्थता बनाए रखने में विफल रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना जिले में तैनाती के बाद से शर्मा ने कथित तौर पर राजनीतिक उम्मीदवारों के खिलाफ दबाव बनाने और डराने-धमकाने जैसे कदम उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियां चुनावी माहौल को दूषित करती हैं और मतदाताओं के बीच निष्पक्ष चुनाव को लेकर भरोसा कम करती हैं। यह भी कहा गया है कि उनकी मौजूदगी से चुनावी प्रक्रिया का संतुलन बिगड़ सकता है।

याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष निगरानी के लिए की जाती है, ताकि लोकतांत्रिक मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। यदि कोई अधिकारी इस भूमिका से हटकर कार्य करता है, तो यह पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह इस मामले का संज्ञान ले और चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे। फिलहाल अदालत की ओर से इस याचिका पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन यह मामला चुनावी माहौल में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

इधर, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए प्रचार मंगलवार को समाप्त हो गया। राज्य की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है। पहले चरण में रिकॉर्ड 93.2 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक दलों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

चुनाव में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। दोनों ही दल उच्च मतदान प्रतिशत को अपने पक्ष में बता रहे हैं और जीत के दावे कर रहे हैं। पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

चुनाव आयोग की निगरानी में हो रहे इस चुनाव को लेकर देशभर की नजरें बंगाल पर टिकी हैं। नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जिनमें असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम भी शामिल होंगे।

यह पूरा घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि लोकतंत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कितने महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में चुनाव से जुड़े हर अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी बेहद अहम हो जाती है, ताकि जनता का भरोसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बना रहे।