एमपी ओबीसी आरक्षण मामला 15 मई तक टला

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-04-2026
MP OBC Reservation Case Adjourned Until May 15
MP OBC Reservation Case Adjourned Until May 15

 

जबलपुर

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में हुई अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई को 13 से 15 मई 2026 के बीच तय किया है। अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर अंतिम और व्यापक निर्णय दिया जा सके।

सुबह 11 बजे शुरू हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात आई कि इस मामले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी, अभी तक हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक मामले में सभी याचिकाओं का एक साथ विचार होना जरूरी है, ताकि अलग-अलग फैसलों से उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ओबीसी आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक और संतुलित निर्णय के लिए सभी कानूनी पहलुओं का समेकित अध्ययन जरूरी है। इसी कारण अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए मई के मध्य में तीन दिन की विस्तृत सुनवाई तय की है।

इस मामले पर शशांक रत्नू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगली सुनवाई 13, 14 और 15 मई को होगी और उम्मीद है कि यही अंतिम सुनवाई साबित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि लंबे समय से लंबित इस मामले का समाधान अब निकट है।

दरअसल, यह पूरा विवाद राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले से जुड़ा है। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी, क्योंकि इससे कुल आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत से अधिक होने का सवाल उठता है, जो संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के तहत एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

इस कानूनी विवाद का सीधा असर राज्य के हजारों सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों और छात्रों पर पड़ रहा है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाएं और प्रवेश व्यवस्थाएं इस मामले के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में आगामी सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि ओबीसी वर्ग राज्य की सामाजिक और चुनावी संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभिन्न राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करते रहे हैं, जिससे इसका प्रभाव केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ रहा है।

अब जब हाई कोर्ट ने सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सुनने का निर्णय लिया है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि मई में होने वाली सुनवाई इस लंबे विवाद का अंतिम अध्याय साबित होगी। राज्य के लाखों लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश की आरक्षण नीति और सामाजिक संतुलन को नई दिशा दे सकता है।