World Day for Safety and Health at Work क्यों मनाया जाता है?

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 28-04-2026
World Day for Safety and Health at Work: Psychologist's important advice on women's safety
World Day for Safety and Health at Work: Psychologist's important advice on women's safety

 

अर्सला खान/नई दिल्ली 

यह दिन हर साल 28 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मकसद काम करने वाली जगहों को सुरक्षित बनाना और कर्मचारियों की सेहत का ध्यान रखना है। दुनिया भर में लाखों लोग हर साल काम से जुड़ी दुर्घटनाओं या बीमारियों का शिकार होते हैं। यह दिन याद दिलाता है कि काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल भी होना चाहिए।
 
यह दिन यह भी बताता है कि कंपनियों और सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल दें। साथ ही लोगों को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना भी इसका बड़ा उद्देश्य है।
 
इस साल की थीम क्या है?

2026 में इस दिन की थीम है: “Revolutionizing health and safety: The role of AI and digitalization at work” यानि इस बार फोकस इस बात पर है कि नई टेक्नोलॉजी जैसे AI और डिजिटल टूल्स कैसे काम करने की जगह को ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं।
 
 
आज के समय में मशीनें, ऐप्स और स्मार्ट सिस्टम्स काम को आसान बना रहे हैं। लेकिन साथ ही यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल कर्मचारियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाए।
 
women safety के क्यो जरूरी है?

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आज कई स्तरों पर कदम उठाए गए हैं, खासकर काम की जगह और पब्लिक स्पेस दोनों में। लेकिन असली फर्क तभी पड़ता है जब इन उपायों का सही तरीके से पालन हो।
 
सबसे पहले बात करें वर्कप्लेस की। भारत में Sexual Harassment of Women at Workplace Act लागू है। इसके तहत हर कंपनी में इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी बनाना जरूरी है। अगर किसी महिला को ऑफिस में harassment महसूस होता है, तो वह सीधे शिकायत कर सकती है। यह कानून महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए बनाया गया है।
 
 
सरकार की तरफ से भी कई हेल्पलाइन और सुरक्षा सिस्टम बनाए गए हैं। जैसे 1091 और 112 जैसे इमरजेंसी नंबर, जहां तुरंत मदद मिल सकती है। इसके अलावा मोबाइल ऐप्स भी हैं, जो लोकेशन शेयर करके मदद पहुंचाने में मदद करते हैं।
 
पब्लिक स्पेस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई शहरों में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। मेट्रो और बसों में महिलाओं के लिए अलग कोच या सीट की व्यवस्था भी की गई है, ताकि सफर सुरक्षित रहे।
 
डिजिटल सुरक्षा भी आज बहुत जरूरी हो गई है। साइबर क्राइम सेल महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन harassment, stalking या फेक प्रोफाइल जैसे मामलों को देखती है। अब ऑनलाइन शिकायत करना भी आसान हो गया है। वर्कप्लेस पर कई कंपनियां महिलाओं के लिए awareness sessions और training भी करवाती हैं, ताकि वे अपने अधिकार समझ सकें और जरूरत पड़ने पर आवाज उठा सकें।
 
 
लेकिन सिर्फ कानून और व्यवस्था काफी नहीं है। जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और किसी भी गलत व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आखिर में बात साफ है। सुरक्षा सिर्फ नियमों से नहीं आती, बल्कि सही सोच और जिम्मेदारी से आती है। जब समाज, कंपनी और व्यक्ति तीनों मिलकर काम करते हैं, तभी महिलाओं के लिए सच में सुरक्षित माहौल बनता है।
 
Shycologist shuchi goel की सलह

शुचि गोयल के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ बाहरी इंतजामों से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और जागरूकता से भी जुड़ी होती है। सबसे पहले, वे कहती हैं कि अपने अंदर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। अगर कहीं असहज महसूस हो, तो उसे हल्के में न लें। आपका instinct अक्सर सही होता है। वे यह भी मानती हैं कि “ना” कहना सीखना बहुत जरूरी है। कई बार महिलाएं सामने वाले को नाराज़ न करने के लिए चुप रह जाती हैं। लेकिन अपनी boundaries साफ रखना ही असली सुरक्षा है।
 
 
उनकी एक अहम सलाह यह है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी जरूर होनी चाहिए। जब आपको पता होता है कि क्या सही है और क्या गलत, तब आप ज्यादा confident होकर अपनी बात रख पाती हैं।
 
शुचि गोयल मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर देती हैं। उनके अनुसार, लगातार डर या तनाव में रहना भी unsafe माहौल का संकेत है। ऐसे में भरोसेमंद लोगों से बात करना और जरूरत पड़े तो professional help लेना जरूरी है। वे यह भी कहती हैं कि self-confidence सबसे बड़ा हथियार है। जब आप खुद पर भरोसा करती हैं, तो आपका व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज भी मजबूत नजर आता है, जो कई बार गलत इरादों को दूर रखता है।
 

shuchi goel कहती हैं 'खुद को कमजोर न समझें। जागरूक रहें। अपनी आवाज उठाएं। और हमेशा याद रखें कि आपकी सुरक्षा सबसे पहले है'