प्रवासी प्रशंसकों ने दक्षिण अफ्रीका में आशा भोसले की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति को याद किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 13-04-2026
Overseas fans recall Asha Bhosle's mesmerising performance in South Africa
Overseas fans recall Asha Bhosle's mesmerising performance in South Africa

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
दक्षिण अफ्रीका के संगीत प्रेमियों ने मशहूर गायिका आशा भोसले को रविवार को श्रद्धांजलि अर्पित की और अक्टूबर 2016 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित उनके संगीत कार्यक्रम को याद किया।
 
दशकों तक, आशा भोसले की सुरीली आवाज दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के घरों में सुनाई देती रही है।
 
बेनोनी की मशहूर गायिका कामेनी कथा ने कहा, ‘‘आशाजी की आवाज बेमिसाल थी... एक ऐसी आवाज़ जो हर पीढ़ी को भाती थी, हर गीत की खूबसूरती को अपनी आवाज में पिरो लेती थी। वह लाखों में एक गायिका थीं, हम उन्हें बहुत याद करेंगे।’’
 
कथा ने कहा, ‘‘आशाजी को मैं जिन दो गानों के लिए सबसे ज़्यादा याद रखूंगी, वे उनके तमिल में गाए दो हिट गाने हैं ‘ओह बटरफ्लाई’ और ‘कोंजा नेरम’- जिन्हें मैंने लाइव शो बैंड के साथ गाया था।’’
 
एक अन्य निवासी अब्दुल रजाक खुद को बॉलीवुड का बड़ा प्रशंसक बताते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे दोनों बहनों (आशा और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर) का गायन बहुत पसंद था, दोनों की अपनी-अपनी अलग शैली थी। आशा के निधन से संगीत के एक महान युग का अंत हो गया है। मेरा मानना है कि आशा ने कव्वाली आधारित गीतों में अपना दबदबा बनाया, जिसमें लता उतनी निपुणता हासिल नहीं कर सकीं।”
 
इस देश में बड़ी संख्या में प्रशंसक होने के बावजूद आशा भोसले लंबे समय तक यहां नहीं आ पाईं और कारण यह था कि भारत ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद शासन के विरोध में लगभग चार दशकों तक संबंध तोड़ते हुए अपने नागरिकों के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर प्रतिबंध लगा दिया था।
 
आशा भोसले का दक्षिण अफ्रीका में संगीत कार्यक्रम आखिरकार अक्टूबर 2016 में हुआ, जब वह 83 वर्ष की थीं।
 
भोसले ने अपनी प्रस्तुति के लिए देश भर से और अफ्रीकी देशों से आए 3,000 से अधिक प्रशंसकों से कहा, ‘‘ आज गांधी जयंती है। गांधीजी का दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों के लिए बहुत महत्व था। नवरात्र का त्योहार भी शुरू हो चुका है और आज से ही मुसलमानों के नव वर्ष मुहर्रम की शुरुआत भी हो रही है।’’
 
उन्होंने कहा था, ‘‘ पिछले 26 सालों से मैं दक्षिण अफ्रीका का दौरा करने का सपना देख रही थी, और इससे बेहतर आशीर्वाद और क्या हो सकता था?”