Out-of-pocket expenditure on healthcare has come down significantly in the last decade: Nadda
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि भारत में पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा पर जेब से होने वाले (बीमा कवर से इतर) खर्च में काफी कमी आई है, जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है।
उन्होंने देहरादून में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले 11 वर्षों में हुई अभूतपूर्व प्रगति पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की संख्या छह से बढ़कर 23 हो गई है, जिससे देश भर में उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में काफी विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़कर लगभग 89 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सुदृढ़ होने को दर्शाती है।
स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए नड्डा ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बारे में बात की, जो प्रति परिवार पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से अब लगभग 62 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है, जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को कवर करता है।
नड्डा ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में भारत में स्वास्थ्य सेवा पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आई है, जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है।’’
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक आबादी के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में दिए गए रुझानों के अनुरूप निरंतर मच्छर-जनित रोग नियंत्रण प्रयासों के माध्यम से मलेरिया की घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।