नई दिल्ली. रमजान के दौरान इबादत करें, प्रार्थना करें और शांति से रहें. सहरी के समय शोर न मचाएं और न ही अनावश्यक रूप से लाउडस्पीकर का प्रयोग कर किसी को परेशान करें. ध्यान रखें कि किसी को चोट न पहुंचे. ताकि रमजान की पवित्रता बनी रहे. यह अपील अंतर्राष्ट्रीय सूफी कारवां के प्रमुख मुफ्ती मुहम्मद मंजूर जियाई ने की है.
एक वीडियो संदेश में उन्होंने मुसलमानों से आग्रह किया कि वे इबादत के महीने की भावना को बनाए रखें, विशेष रूप से भोर से पहले के भोजन के दौरान इसकी पवित्रता बनाए रखें और किसी भी प्रकार के शोर से बचें.
انٹرنیشنل صوفی کارواں کے سربرا مفتی محمد منظور ضیائی کی رمضان المبارک کے موقع پر
— Awaz-The Voice URDU اردو (@AwazTheVoiceUrd) March 2, 2025
خصوصی اپیل - پارٹ 2#Ramzan #Ramadan #India #Muslims pic.twitter.com/dZuFF0OTdX
उन्होंने संदेश में कहा कि रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है. हम सभी इबादत के महीने में डूबे हुए हैं. मैं रमजान के पवित्र महीने के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं. यह मुबारक महीना हमें अल्लाह तआला की तरफ से अता किया गया है, जो पूरी तरह से उनकी कृपा और दया तथा पवित्र पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम) के आशीर्वाद से हमारे पास आया है. रमजान दया, आशीर्वाद और क्षमा का महीना है, जिसमें अल्लाह सर्वशक्तिमान हमें विशेष आशीर्वाद प्रदान करता है. इस पवित्र महीने में हमें शुद्ध इरादों के साथ अपनी इबादत करनी चाहिए और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए.
उन्होंने संदेश में कहा कि हम सभी को यह समझना होगा कि हमारे किसी भी शब्द या कार्य से किसी को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए. विशेषकर सहरी के समय हमें सावधान रहना चाहिए कि हमारी किसी भी हरकत से किसी को परेशानी या असुविधा न हो. कुछ स्थानों पर यह देखा गया है कि सहरी के समय लाउडस्पीकरों पर तेज आवाजें बजाई जाती हैं, नात व अन्य घोषणाएं की जाती हैं, जिससे नींद में खलल पड़ता है और कुछ लोगों को असुविधा होती है.
हालांकि, रोजा एक बन्दे और उसके रब के बीच इबादत का एक विशेष कार्य है, जिसका इनाम अल्लाह तआला खुद देता है. हमें भोर से पहले की प्रार्थनाओं और अन्य पूजा-पाठों में अनुशासन बनाए रखना चाहिए, शांति और शांति से अल्लाह का स्मरण करना चाहिए तथा दूसरों की नींद या आराम में खलल नहीं डालना चाहिए. अगर हम खुद समय पर उठें, सहरी खाएं, इबादत करें और कुरान पाक की तिलावत करें तो हमारे रोजे जरूर बरकत वाले होंगे और अल्लाह तआला हमें इसका बेहतरीन इनाम देगा.
उन्होंने आगे कहा कि रमजान का सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि हमें अल्लाह के करीब जाना चाहिए, अपने दिलों को शुद्ध करना चाहिए, पवित्र कुरान की तिलावत को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और अच्छे कामों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए. अल्लाह तआला हमारे सभी रोजे,नमाज और प्रार्थनाएं स्वीकार करें. यह मुबारक महीना हम सभी के लिए अच्छाई और आशीर्वाद, हमारे परिवारों के लिए क्षमा और पूरे मुस्लिम उम्माह के लिए दया लेकर आए. साथ ही, हम प्रार्थना करते हैं कि हमारे देश में शांति और व्यवस्था कायम रहे तथा समस्त मानवता को शांति और सुख-शांति का आशीर्वाद मिले.