नई दिल्ली
भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों के तहत सशस्त्र बलों के बीच त्रि-सेवा समन्वय (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) का अब तक का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान सेना को “कार्रवाई या प्रतिक्रिया” की पूरी स्वतंत्रता दी गई।
राजधानी में आयोजित वार्षिक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुस्साहसिक कार्रवाई का “दृढ़ता से जवाब दिया जाएगा।” उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सभी हितधारकों की सक्रिय भूमिका की सराहना की, जिनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), खुफिया एजेंसियां, नागरिक निकाय, राज्य प्रशासन और गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय सहित अन्य मंत्रालय शामिल हैं।
थलसेना प्रमुख ने कहा कि इस अभियान ने भारत की रणनीतिक सोच को नया रूप दिया। “पहलगाम आतंकी हमले के बाद शीर्ष स्तर पर निर्णायक जवाब देने का स्पष्ट फैसला लिया गया। ऑपरेशन सिंदूर की योजना सटीकता के साथ बनाई गई और उसे प्रभावी ढंग से अंजाम दिया गया। 7 मई को मात्र 22 मिनट में इसकी शुरुआत हुई और 10 मई तक 88 घंटे चले समन्वित अभियान के माध्यम से गहराई तक प्रहार कर आतंकी ढांचे को ध्वस्त किया गया तथा लंबे समय से चली आ रही परमाणु धमकियों की धार को कुंद किया गया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने जानकारी दी कि सेना ने नौ में से सात प्रमुख लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया और इसके बाद पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाइयों पर संतुलित और नियंत्रित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
जनरल द्विवेदी ने वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों की संख्या और तीव्रता में तेजी से वृद्धि हुई है। “ये बदलाव एक सच्चाई को रेखांकित करते हैं—जो राष्ट्र तैयार रहते हैं, वही टिकते हैं। इस संदर्भ में ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की तैयारी, सटीकता और रणनीतिक स्पष्टता को प्रदर्शित किया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय सेना वर्ष 2025 में ‘जेएआई’—जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और नवाचार के तहत किए गए सुधारों और पहलों से संतुष्ट है। यह प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2025 में दिया गया आह्वान और रक्षा मंत्री द्वारा जनवरी 2025 में घोषित सुधारों का हिस्सा है। थलसेना प्रमुख ने कहा कि परिवर्तन के इस दशक में 2025 भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण प्रगति का वर्ष रहा।