"कभी निष्पक्ष, अब धोखाधड़ी": आदित्य ठाकरे ने SIR प्रक्रिया को लेकर EC की आलोचना की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 23-09-2026
"Once impartial, now fraud": Aaditya Thackeray slams EC over SIR process; calls India "largest former democracy"

 

मुंबई (महाराष्ट्र) 
 
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बुधवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक पक्षपाती संस्था के तौर पर काम कर रहा है और इसने कई भारतीयों के वोटिंग अधिकारों को प्रभावित किया है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए - जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां जताई थीं - आदित्य ठाकरे ने 'X' पर एक पोस्ट में दावा किया कि संस्था ने अपनी निष्पक्षता से समझौता किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के फैसलों की वजह से लाखों नागरिकों के वोटिंग अधिकार सुनियोजित तरीके से छीन लिए गए हैं।
 
आदित्य ठाकरे ने लिखा, "इस @ECISVEEP ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा 'पूर्व लोकतंत्र' बना दिया है! एक पार्टी के एजेंट के तौर पर काम करते हुए, भारत के लोकतंत्र को खत्म करने के लिए उन्होंने लाखों भारतीयों के वोटिंग अधिकार छीन लिए हैं।" मौजूदा हालात की तुलना आज़ादी के बाद के लोकतांत्रिक ढांचे से करते हुए ठाकरे ने तर्क दिया कि देश ने जो 'सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार' (universal adult suffrage) बड़ी मुश्किल से हासिल किया था, उसे कमज़ोर कर दिया गया है।
 
आदित्य ठाकरे ने कहा, "आज़ादी के समय जो 'सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार' शुरू हुआ था, उसे इस संस्था ने अब 'चुनिंदा वोटर लिस्ट' में बदल दिया है। जो संस्था कभी निष्पक्ष थी, वह अब धोखाधड़ी कर रही है!" इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां जताई थीं।
 
बनर्जी ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "CEC को तुरंत हटाया जाना चाहिए और कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दिया जाना चाहिए। किसी एक राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों वोटरों के अधिकार छीनना हमारे लोकतंत्र की नींव पर प्रहार है। इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "सुप्रीम कोर्ट इससे मुंह नहीं मोड़ सकता। अंतिम ज़िम्मेदारी उसी की है। क्या CJI की अध्यक्षता वाली बेंच इस पर कोई कदम उठाएगी?" कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रिपोर्ट सही है, तो वे चुनाव आयोग के फैसलों और फैसला लेने की प्रक्रिया - दोनों पर सवाल उठाएंगे। चिदंबरम ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "अगर आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबरें सही हैं, तो वे भारत के चुनाव आयोग (ECI) की नींव हिला देती हैं। इसमें दो अलग-अलग बातें हैं: 1. फैसला; और 2. फैसला लेने की प्रक्रिया।"
 
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट को कम अहमियत देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसलों समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले, दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इससे पहले अप्रैल में, विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किए थे। अप्रैल 2026 में, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने "साबित कदाचार" के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने के लिए एक नया नोटिस सौंपा था।
 
रमेश ने कहा था कि यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के तहत पेश किया गया था। इससे पहले, लोकसभा में भी ऐसा ही एक नोटिस सौंपा गया था। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बाद में विचार करने के बाद इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।