कतर ही नहीं, कई देशों में मोदी सरकार बनी 'संकटमोचक'

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] • 22 d ago
Narendra Modi
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नई दिल्ली. दुनिया में एक बार फिर भारत सरकार की सफल कूटनीति दिखी. कतर में काम कर रहे 8 भारतीय नौसेना के पूर्व अफसरों को रिहा कर दिया गया है, जिनमें 7 सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं. भारत लौटे सभी पूर्व अधिकारियों ने मोदी सरकार को इसका पूरा श्रेय दिया.

बता दें कि इन सभी पूर्व अधिकारियों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कतर की एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं, मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद फांसी की सजा को घटाकर उम्रकैद में बदला गया और आज सरकार की सफल विदेश नीति के बाद कतर ने 8 पूर्व अधिकारियों को सुरक्षित छोड़ दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में सीओपी28 शिखर सम्मेलन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भेंट की थी. द्विपक्षीय साझेदारी और कतर में रहने वाले भारतीयों की भलाई पर चर्चा भी की थी. इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल ने भी इस मुद्दे को कतर के सामने बार-बार उठाया था.

इसी का नतीजा है कि 18 महीने बाद सोमवार को 8 पूर्व भारतीय अधिकारियों की वतन वापसी हो पाई. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब मोदी सरकार की कूटनीति को जीत मिली हो. भारत सरकार ने अपने कार्यकाल में कई रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए भारतीय नागरिकों को सकुशल स्वदेश पहुंचाया है. बीते नौ सालों में विदेश मंत्रालय ने कई अभियानों के तहत युद्धग्रस्त देशों से हजारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है.

खास बात ये भी है कि मोदी सरकार में दूसरे मुल्कों से न केवल भारतीय नागरिक सुरक्षित स्वदेश लौटे, बल्कि इन ऑपरेशन के तहत दूसरे देशों के लोगों को भी सकुशल उनके घर पहुंचाया. यूक्रेन-रूस के बीच छिड़ी जंग के बीच से मोदी सरकार ने ऑपरेशन गंगा के तहत 22,500 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला. इसी तरह 2023 में ऑपरेशन कावेरी के तहत सूडान से 3,800 से अधिक भारतीयों की वतन वापसी करवाई.

इसके अलावा, साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान ने कब्जा कर लिया था. इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन देवी शक्ति के जरिए अफगानिस्तान से लगभग 1,200 लोगों को सकुशल बाहर निकाला. इन लोगों में अफगान हिंदू/सिख अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 206 अफगान भी शामिल थे.

बता दें कि पीएम मोदी खुद इस अभियान पर पैनी नजर बनाए हुए थे. इससे पहले, 2015 में जब यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच जंग छिड़ी थी, तब भी मोदी सरकार ने ऑपरेशन राहत के तहत यमन से लगभग 5,600 लोगों को निकाला था.

फरवरी 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 लड़ाकू विमान को ध्वस्त कर दिया था. जिसके बाद उनकी पाकिस्तान में ही क्रैश लैंडिंग हो गई थी तब भारत सरकार के कड़े एक्शन के खौफ के चलते पाकिस्तान ने विंग कमांडर को सुरक्षित वाघा बॉर्डर से भारत भेजा था. 

 

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