खाड़ी के संकट में फरिश्ता बने यूसुफ अली, भारत से पहुंचा रहे हजारों टन खाना

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 19-03-2026
Yusuff Ali Becomes an Angel Amidst the Gulf Crisis, Delivering Thousands of Tons of Food from India.
Yusuff Ali Becomes an Angel Amidst the Gulf Crisis, Delivering Thousands of Tons of Food from India.

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

कहते हैं कि इंसान की असली पहचान संकट के समय ही होती है। दुनिया आज लुलु ग्रुप के मालिक एम.ए. यूसुफ अली को एक दिग्गज कारोबारी के रूप में जानती है। लेकिन उनके इस साम्राज्य की नींव केवल मुनाफे पर नहीं बल्कि संघर्ष और अपनों के साथ पर टिकी है। आज जब इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने खाड़ी देशों की शांति को भंग कर दिया है, तब यूसुफ अली एक अलग भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस युद्ध की वजह से खाड़ी क्षेत्र में मालवाहक जहाजों की आवाजाही और हवाई उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

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मंडराते खतरों के बीच जब दुनिया के बड़े-बड़े कारोबारी हाथ पर हाथ धरे बैठे थे, तब यूसुफ अली ने खाड़ी के देशों को भूखा न रहने देने का बीड़ा उठाया। उन्होंने भारत से ताजे फल, सब्जियां और मांस भेजने के लिए विशेष कार्गो विमानों का एक पूरा बेड़ा ही उतार दिया है।

cयह कोई सामान्य व्यापारिक खेप नहीं है। यह एक ऐसी जीवनरेखा है जो युद्ध के साये में जी रहे लाखों लोगों तक ताजा खाना पहुंचा रही है। हाल ही में लुलु ग्रुप ने भारत के विभिन्न शहरों से कुवैत और यूएई के लिए विशेष उड़ानें संचालित कीं।

आंकड़ों की बात करें तो अब तक तकरीबन 80,000 किलोग्राम ताजा उत्पाद खाड़ी देशों तक पहुंचाया जा चुका है। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध की वजह से जब समुद्री रास्ते असुरक्षित हो गए और बीमा की दरें आसमान छूने लगीं, तब यूसुफ अली ने हवाई मार्ग को चुना। उन्होंने साबित कर दिया कि खाड़ी देशों ने उन्हें जो ऊंचाइयां दी हैं, वे उसका कर्ज चुकाना जानते हैं।

लुलु ग्रुप इंटरनेशनल ने हाल ही में जानकारी दी कि उन्होंने कोच्चि और दिल्ली से कुवैत के लिए विशेष कार्गो उड़ानों का इंतजाम किया। कुवैत एयरवेज के जरिए संचालित इन उड़ानों का मकसद सिर्फ स्टोर भरना नहीं बल्कि बाजार में घबराहट को रोकना था। 12 मार्च की सुबह कोच्चि एयरपोर्ट से एक विमान 32 टन ताजे फल और सब्जियां लेकर रवाना हुआ।

वहीं दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक और विशाल विमान 50 टन ताजा मांस और अन्य जरूरी सामान लेकर कुवैत पहुंचा।

ये विमान खाली यात्री विमान थे जिन्हें खास तौर पर सिर्फ सामान ढोने के लिए तैयार किया गया था। इस पूरी मुहिम के पीछे लुलु ग्रुप की भारतीय इकाई 'फेयर एक्सपोर्ट्स' का हाथ है, जो दिन-रात काम करके ताजे माल की पैकेजिंग और सप्लाई सुनिश्चित कर रही है।

खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए भारत हमेशा से रसोई की तरह रहा है। यहां से जाने वाला चावल, मसाले, प्याज और मांस वहां की रोजमर्रा की जरूरतों का बड़ा हिस्सा हैं। युद्ध की स्थिति में सबसे बड़ा डर सप्लाई चेन टूटने का होता है।

अगर सुपरमार्केट की अलमारियां खाली हो जाएं तो जनता के बीच अफरा-तफरी मच सकती है। यूसुफ अली इसी मनोवैज्ञानिक डर को खत्म करने में जुटे हैं।

उनके ग्रुप डायरेक्टर मोहम्मद अल्थाफ़ बताते हैं कि लुलु ने अपने पूरे नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट रूट जोड़े हैं। उन्होंने साफ किया है कि फिलहाल किसी भी प्रोडक्ट की कमी या स्टॉक को लेकर कोई खतरा नहीं है। लुलु की मौजूदगी केवल यूएई या कुवैत तक सीमित नहीं है। वे पूरे जीसीसी क्षेत्र के 60 मिलियन से ज्यादा ग्राहकों को सेवा देते हैं।

युद्ध के बीच जब ईरान की बमबारी और जवाबी हमलों की खबरें आती हैं, तब लॉजिस्टिक्स का काम करना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। लेकिन एतिहाद एयरवेज और कुवैत एयरवेज के साथ मिलकर लुलु ग्रुप ने इस चुनौती को स्वीकार किया।

पिछले हफ्ते ही कोच्चि, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से यूएई तक हजारों पैकेट ताजा खाना भेजा गया। शनिवार की सुबह जब एतिहाद का कार्गो विमान अबू धाबी पहुंचा, तो उसमें 80,000 किलोग्राम ताजे उत्पाद लदे थे। यूएई के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्रालय ने भी इस तत्परता की सराहना की है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश का रणनीतिक भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है।

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यूसुफ अली का भारत से गहरा लगाव है। वे जानते हैं कि दक्षिण भारत से आने वाला नारियल, सीफूड और मसाले वहां रहने वाले करोड़ों भारतीयों और स्थानीय लोगों की जान हैं। भारत के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई और बेंगलुरु से भी लगातार खेप मंगवाई जा रही है।

यह सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक बड़ा मिशन है। जीसीसी देशों ने पिछले एक दशक में डेयरी और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में काफी प्रगति की है। लेकिन मुख्य अनाज और ताजे उत्पादों के लिए वे अभी भी आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में रणनीतिक भंडारण और कुशल रिटेल वितरण प्रणालियां एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं।

अल्थाफ़ के अनुसार, वैश्विक संघर्षों की वजह से चीजों के दाम अस्थायी रूप से बढ़ सकते हैं। माल ढुलाई की लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ने से दबाव पैदा होता है। लेकिन जब रिटेलर पर्याप्त स्टॉक बनाए रखते हैं, तो बाजार में स्थिरता आती है।

इससे लोग 'पैनिक बाइंग' यानी घबराहट में सामान जमा करने से बचते हैं। लुलु ग्रुप ने अपने सप्लायर्स के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का फायदा उठाते हुए इस संकट को कम करने की कोशिश की है। यूसुफ अली की इस पहल ने न केवल खाड़ी देशों में खाने की किल्लत को रोका है, बल्कि भारत के किसानों और निर्यातकों के लिए भी एक बड़ा रास्ता खुला रखा है।

जब हम युद्ध की विनाशकारी खबरें सुनते हैं, तब परदे के पीछे चल रही ये कोशिशें एक उम्मीद जगाती हैं। यूसुफ अली ने 1997 में जिस छोटी सी शुरुआत के साथ लुलु ग्रुप की नींव रखी थी, आज वह संकट के समय एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ा है। एशिया से लेकर यूरोप तक फैले उनके 250 से ज्यादा स्टोर्स आज लाखों लोगों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इस युद्ध ने दुनिया को दिखा दिया कि परिवहन के रास्ते भले ही बंद हो जाएं, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो आसमान से भी रास्ते बनाए जा सकते हैं।

भारत के कोच्चि से लेकर अबू धाबी के रेगिस्तान तक, ये कार्गो विमान केवल सामान नहीं ढो रहे, बल्कि एक भरोसा लेकर उड़ रहे हैं। यह भरोसा है कि मुश्किल वक्त में भी थाली खाली नहीं रहेगी। लुलु ग्रुप की यह त्वरित लॉजिस्टिक्स रणनीति अन्य खुदरा विक्रेताओं के लिए भी एक सबक है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे समुद्री मार्गों की बाधा को हवाई माल ढुलाई के जरिए पार किया जा सकता है। आने वाले दिनों में और भी चार्टर उड़ानों की योजना बनाई गई है ताकि स्टॉक का स्तर कभी कम न हो।

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यूसुफ अली की यह कहानी एक सफल उद्यमी से कहीं बढ़कर एक जिम्मेदार नागरिक की है। उन्होंने अपनी जड़ों और अपने कर्मक्षेत्र, दोनों के प्रति वफादारी निभाई है। भारत का ताजा मांस और सब्जियां जब खाड़ी के बाजारों में पहुंचती हैं, तो वहां रहने वाले प्रवासियों को भी एक मानसिक सुकून मिलता है।

वे महसूस करते हैं कि संकट की इस घड़ी में भी कोई है जो उनके बारे में सोच रहा है। लुलु ग्रुप का यह एयर कार्गो ऑपरेशन इतिहास में संकट प्रबंधन की एक बड़ी मिसाल के तौर पर याद रखा जाएगा। यह साबित करता है कि व्यापार केवल पैसे कमाने का जरिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक सशक्त माध्यम भी हो सकता है।