प्रधन से निजी मुलाकात नहीं, सम्मेलन में शामिल हुआ: शम्सुद्दीन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 24-07-2026
No private meeting with the Prime Minister; attended the conference: Shamsuddin
No private meeting with the Prime Minister; attended the conference: Shamsuddin

 

तिरुवनंतपुरम:

केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उनकी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ कोई निजी मुलाकात नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि वह केवल सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के लिए पहले से निर्धारित एक आधिकारिक सम्मेलन में शामिल हुए थे, जिसका उद्देश्य शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राज्यों की राय और सुझाव प्राप्त करना था।

मंत्री शम्सुद्दीन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस बैठक को व्यक्तिगत मुलाकात के रूप में पेश करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन केंद्र सरकार की ओर से पहले से तय कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक में शिक्षा क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मुख्य रूप से समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) योजना के तहत राज्यों को मिलने वाली वित्तीय सहायता की समीक्षा की गई। इसके अलावा केंद्र सरकार की प्रस्तावित पीएम पोषण (PM Poshan) योजना पर भी चर्चा हुई। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ नाश्ता भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। साथ ही इस योजना का दायरा बढ़ाकर कक्षा आठ तक सीमित रखने के बजाय कक्षा 12 तक के सभी विद्यार्थियों को इसका लाभ देने पर विचार किया जा रहा है।

शम्सुद्दीन ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य इन दोनों योजनाओं को लेकर राज्यों के सुझाव लेना था। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए इसमें भाग लिया। उन्होंने दोहराया कि यह किसी भी तरह से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ व्यक्तिगत मुलाकात नहीं थी।

उनकी यह सफाई ऐसे समय आई है जब कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। आलोचकों का कहना था कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं, विशेषकर नीट (NEET) समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शम्सुद्दीन का सम्मेलन में शामिल होना उचित नहीं था।

हालांकि, केरल के शिक्षा मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक औपचारिक सरकारी बैठक थी और इसमें सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने निर्धारित एजेंडे के अनुसार भाग लिया। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है और उसी उद्देश्य से वे सम्मेलन में शामिल हुए।

शम्सुद्दीन ने बताया कि उन्होंने सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष केरल का एक महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा योजना के तहत केरल को लगभग 1,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि अब तक नहीं मिली है, जिससे राज्य में कई शैक्षणिक परियोजनाओं और योजनाओं पर असर पड़ रहा है।

उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि इस बकाया राशि को जल्द जारी किया जाए और इसे पीएम श्री (PM SHRI) योजना से नहीं जोड़ा जाए, क्योंकि दोनों योजनाएं अलग-अलग हैं और उनकी वित्तीय व्यवस्था भी अलग है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीएम पोषण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।

शम्सुद्दीन ने कहा कि यदि राज्य को केंद्र से मिलने वाली बकाया राशि समय पर मिलती है और नई योजनाओं में सहयोग जारी रहता है, तो इससे केरल के लाखों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और पोषण संबंधी लाभ मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐसे सम्मेलनों में भाग लेना आवश्यक है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।